संस्कार मंजरी की काव्य गोष्ठी सम्पन्न
ग्वालियर । अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर – संस्कार मंजरी की काव्य गोष्ठी मातृशक्ति को समर्पित रही । वरिष्ठ कवियत्री सुबोध चतुर्वेदी की अध्यक्षता ‘ आशा सिंह दीदी के मुख्य आतिथ्य व कांदम्बरी आर्य के विशिष्ट आतिथ्य में सृष्टि अपार्टमेंट मे सम्पन्न कार्यक्रम में स्वागत वक्तव्य संस्थापक नीलम जगदीश गुप्ता ने दिया । पुष्पा शर्मा के संचालन में संयोजक प्रतिभा द्विवेदी ने आभार व्यक्त किया । महिला दिवस को केन्द्र में रखकर सरस्वती पूजन के उपरांत कवित्रियों ने अपनी रचनाओं का सस्वर पाठ कर वातावरण को आनंदित बनाया।
सृष्टि का श्रृंगार है जननी जीवन का आधार
शब्द नहीं कर पाए मां की ममता का आभार
नीलम जगदीश गुप्ता
बच्चों को छाँव मिलती रहे उम्र भर घनी
मां बनके धूप इसलिए सहती है बेटियां
कादम्बरी आर्य
आराधन में जीवन बीता क्या परिणाम मिला !
एक उदास अंधेरा ही , तुमको हर शाम मिला .
नहीं ज़रूरत अब पीड़ा को गीत बनाने की
-श्रीमती गिरिजा कुलश्रेष्ठ.
सुभग रूप में शोभती, नारी कर श्रृंगार ।
नाना काज संवारती , बन नव जीवन आधार।।
पुष्पा शर्मा
ससुराल आए आज उसे दूसरा दिन था अभी अभी नहा धोकर किया था पूरा श्रृंगार
पड़ौस की औरतें आने वाली थी करने को मुंह दिखाई
-श्रीमती सुबोध चतुर्वेदी
नाना तरह के रूप दिखाती है नारियां। कभी दहकती आग कभी शबनम हैं नारियां।
लख जुल्म सहे पर लव पर मुस्कान है भरी। अश्कों के समंदर को पीती हैं नारियां।
-डॉ० मंजुलता आर्य
मौन जिसका है मुखरित और प्रेम व्यक्त है, समय यही बतला रहा कि नारी सशक्त है।
हौसलों के पर लगा कर देखो वो उड़ रही, भावना की धरा पर धीरे से उतर रही,
आज उसकी हर परवाज़ देखो उन्मुक्त है, समय यही बतला रहा कि नारी सशक्त है।
डॉ मुक्ता सिकरवार
समय की झंकार हूं मैं समय का विस्तार हूं मैं।
तू जहां पर खोजता है उस जगह पर द्वार हूं मै।।
माधवी सिंह
देना चाहो मान यदि, इतना रखना ध्यान ।
उसके पंखों को मिले ,अम्बर और उड़ान ।।
प्रतिभा द्विवेदी
हमको सुधि न जन्म से पहले अपनी कहाँ अटारी थी।
आंख खुली तो नभ के नीचे बाबुल गोद तुम्हारी थी।
ब्याह हुआ तो जले मुहल्ला पुत्र हुआ तो बंध्या
और हुआ जब अंत हमारा बिना जलाये जल उठीं
चिता की जल जल उठी लकडियां।
-डॉ प्रतिभा त्रिवेदी
इस अवसर पर आलोक शर्मा सीता चौहान साहित संस्था के सदस्य व गणमान्य साहित्यकार उपस्थित रहे।

