वीरांगना लक्ष्मीबाई बलिदान मेला का संतों के सानिध्य में हुआ भूमि पूजन
ग्वालियर – वीरांगना बलिदान मेला के 26वे आयोजन के लिए शनिवार को प्रमुख धर्माचार्यों के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भूमि पूजन किया गया। संतजनों के सानिध्य में अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्रीधर पराड़कर द्वारा पं. बृजेश पांडे के अचार्यत्व में भूमिपूजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर मेला के संस्थापक अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया ने कहा कि ग्वालियर तानसेन के कारण संगीत की धरा है, वैसे ही ग्वालियर में स्थित वीरांगना लक्ष्मीबाई की समाधि देशभक्ति का तीर्थ स्थल है।
रानी लक्ष्मीबाई की समाधि के सामने 17 व 18 जून को होने वाले वीरांगना बलिदान मेला के लिए शनिवार की सांध्यबेला में ग्वालियर स्थित सन् 1858 के क्रांति मैदान पर संत प्रवर दंदरौआ सरकार महामण्डलेश्वर स्वामी रामदास महाराज जी, ढोली बुआजी महाराज, स्वामी ऋषभानंद, रमेश लाल दादा, रामभजन दास, पागल बाबा, नारायणदास व राघवेन्द्रदास महाराज सहित अन्य संतजनों के सानिध्य में भव्यता के साथ भूमिपूजन कार्यक्रम आयोजित हुआ। 26वें वर्ष में प्रवेश करने वाले अखंड आयोजन ने नयी पीढ़ी में राष्ट्र के लिये जीने के बीज बोये हैं। उन्होंने कहा कि हमें आजादी शहीदों के बलिदान से मिली है। यह अमूल्य बलिदान भूल गये तो हम पतन के गर्त में चले जाएँगे। ग्वालियर और चंबल ने क्रांतिवीरों से प्रेरणा लेकर लेकर सर्वाधिक सैनिक सरहदों पर दिये हैं।
इस मौके पर श्रीधर पराड़कर ने कहा कि ग्वालियर का यह बलिदान मेला पूरे देश में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है, रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान से समूचे भारत की नारी शक्ति को साहस और शौर्य की प्रेरणा मिलती है। दंदरौआ सरकार महांत रामदास महाराज ने कहा कि देश और धर्म की रक्षा शस्त्रों और वीरता से हुयी है, ऐसे आयोजन समाज में राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव पैदा करते हैं।

