वक्फ बिल को लेकर राजनीतिक दल सुप्रीम कोर्ट की शरण में, क्या सुप्रीम कोर्ट रोक सकता है संसद से बना कानून?
नई दिल्ली. वक्फ संशोधन बिल के कानून बनने का रास्ता अब साफ हो चुका है। लोकसभा और फिर राज्यसभा से मंजूरी मिलने के बाद इस बिल पर सिर्फ राष्ट्रपति की मुहर लगने का इंतजार हे। संसद और सड़क पर विपक्षी दलों दलों के विरोध के बावजूद सरकार दोनों सदनों से इस बिल को पारित कराने में कामयाबी रही है। अब मुस्लिम संगठनों से लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इस बिल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में है। इस मामले में पहली रिट याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की जा चुकी है। बिहार के किशनगंज से कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेदन ने कोर्ट में रिट पिटीशन दी है।
वक्फ बिल पर कानूनी लड़ाई शुरू
कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने शुक्रवार को कहा है कि कांग्रेस पार्टी जल्द ही इस बिल की संवैधानिकता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। उन्होंने बताया कि पार्टी पहले ही नागरिकता कानून सीएए, आरटीआई कानून, चुनाव नियमों से जुड़े कानून को सर्वोच्च अदालत में चुनौती दे चुकी है। यह सभी मामले कोर्ट में चल रहे हैं। इसके अलावा पूजास्थल अधिनियम को भी कांग्र्रेस की ओर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गयी है। इस कड़ी में अगला नाम वक्फ संशोधन बिल का जुड़ने वाला है।
सुप्रीम कोर्ट के पाले में है गेंद
संसद का कम कानून बनाना है और लोकसभा-राज्यसभा ने अपना काम कर दिया है। अब यह बिल संविधान के अनुसार है या नहीं यह तय करने का अधिकार सुप्रीम कोर्ट के पास है। बिल को चुनौती देने वाले और इसका विरोध करने वाले बहुत है। लेकिन सुप्रीम कोई इस बिल को संविधान की कसौटी पर तौलेगा। फिर तय करेगा कि यह बिल संवैधानिक है या फिर नहीं है। बिल की खिलाफत करने वाले भी इसे संवैधानिक आधार पर ही कोर्ट में चुनौती देने वाले हैं।
सुप्रीम कोर्ट कानून को रोक सकती है क्या
अगर सुप्रीम कोर्ट के अतिधकारों की बात करें तो वह संसद की ओर से बनाये गये किसी कानून की व्ख्याख्या कर सकता है। लेकिन अगर वह कानून किसी को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन मानता है। ऐसी स्थिति में सर्वोच्च अदालत के पास उस पर रोक लगाने का अधिकार भी है। लेकिन ऐसा तभी हो सकता है। जब संसद से पारित कानून संवैधानिक को हनन करता हो। कोर्ट ही यह तय करेगा। इस कानून से संविधान में निहित अधिकारों का कैसे हनन हो रहा है। हालांकि इसके बाद संसद के पास दो तिहाई बहुमत के जरिये संविधान संशोधन लाकर उस बिल को फिर से पास कराने का अधिकार भी है।

