यूक्रेन से लौटे स्टूडेंट्स MP नहीं कर पाएंगे मेडिकल की पढ़ाई
इंदौर. यूक्रेन पर रूस के हमले की बड़ी कीमत देश के करीब 15 हजार एमबीबीएस विद्यार्थियों को चुकानी पड़ रही है। भारत लौटे इन विद्यार्थियों को नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमएसी) ने देश के मेडिकल कॉलेजों में समायोजित करने से इनकार किया है। इसका असर मध्यप्रदेश के एक हजार से अधिक विद्यार्थियों पर पड़ा है। एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए लाखों रुपए खर्च करने के बावजूद संकट काल में इन विद्यार्थियों को पढ़ाई बीच में छोड़कर भारत लौटना पड़ा था।
राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग ने 30 जून तक डिग्री या डिप्लोमा पूरा करने वाले छात्रों को फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जाम में भाग लेने की छूट दी है, लेकिन जिनकी डिग्री पूरी नहीं हुई है, उनके लिए आगे की पढ़ाई मुश्किल है। यूक्रेन से लौटने के दौरान कहा गया था कि इनको भारत में ही समायोजित किया जाएगा। आवश्कता पड़ी तो फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट लाइसेंसिएट रेगुलेशन एक्ट में बदलाव पर भी विचार होगा। लेकिन एनएमसी ने विद्यार्थियों को एडजस्ट करने की अनुमति नहीं दी है। केंद्र ने भी राज्यसभा में यह स्पष्ट किया है।
अन्य देशों में ट्रांसफर से प्रवेश लेने से पहले वहां का अच्छा क्लिनिकल रोटेशन हॉस्पिटल और अच्छी इंटर्नशिप सुविधा की पड़ताल कर लें। विदेश में प्रवेश लेने से पहले भारतीय दूतावास से जानकारी लें, एनएमसी नियमों को समझकर ही आगे की योजना बनाएं।

