माह के आखिर में परिवहन निरीक्षकों को बदला जा सकता है, परिवहन निरीक्षकों ने भी अपने एप्रोच लगानी शुरू की
ग्वालियर. परिवहन विभाग में रोटेशन सिस्टम चलता है जिसके तहत 6 माह में चेकपोस्ट प्रभारियों सहित प्रवर्तन अमले की अदला-बदली की जाती है लेकिन कुछ समय से यह व्यवस्था गड़बड़ा गई थी जिसे पुनः पटरी पर लाया जा रहा है। इसके पीछे कारण यह है कि 6 माह से अधिक समय तक चेपो पर जमे रहने वाले निरीक्षकों को लेकर विभाग में ही नाराजगी पनपने लगी थी। इस माह के आखिर में कुछ परिवहन निरीक्षकों को बदला जा सकता है इसको लेकर मंथन चल रहा है। विभागीय जानकारों का कहना है कि सूची जारी होने की भनक लगने के बाद चेपो पर पदस्थी के लिए तैयार बैठे परिवहन निरीक्षकों ने भी अपने एप्रोच लगानी शुरू कर दी है। वैसे जो चेपो पर 6 माह से डटे हुए है वह भी पुनः उसी चेपो पर बने रहने के लिए अपनी जुगाड़ लगा रहे हैं। अब देखना यह है कि कौन जाता है ओर कौन रहता है।
परिवहन आयुक्त के स्टेनो के खिलाफ माहौल तैयार किया
वैसे विभाग में कुछ समय से अंदरखाने आपसी टसल चल रही है जिसको लेकर आपसी द्वंद सामने आ चुका है क्योंकि विभाग में ही अब अपने विरोधियों को निपटाने की रणनीति के तहत काम होने लगा है। परिवहन आयुक्त के स्टेनो के खिलाफ एक माहौल तैयार किया गया जिसको कुछ निरीक्षक हवा देने का काम कर रहे है ओर वरिष्ठ अधिकारी को उसके खिलाफ भड़काने में लगे हुए है। यही कारण है कि स्टेनो की नेमप्लेट तक उसके कक्ष के बाहर से हटा दी गई थी जिसको लेकर जब स्टेनो से बात की गई तो उनका कहना था कि ऐसा कुछ नहीं है। अब निरीक्षकों के तबादले को लेकर सूची बन चुकी है। सूची को लेकर अभी मंत्री एवं परिवहन आयुक्त के बीच बैठकर मंथन होना है उसके बाद ही उक्त सूची फाइनल की जाएगी। सूत्र का कहना है कि माह के आखिर तक अगर तबादला सूची जारी नहीं हो पाती है तो फिर 5 दिसंबर के बाद ही तबादला सूची जारी हो सकेगी।
मुरैना चेपो पर एक निरीक्षक लम्बे समय तक रह चुके
विभागीय जानकारों का कहना है कि कुछ परिवहन निरीक्षक ऐसे है जिनकी नौकरी एक ही चेपो तक सीमित रही है। ऐसे में जब वह हटते है तो मुख्यालय अटैच हो जाते है ओर उसके बाद फिर उसी चेपो पर पहुंचने की जुगाड़ लगाने लगते हैं। ऐसे ही मुरैना चेपो पर एक निरीक्षक लम्बे समय तक रह चुके है ओर यह कहे कि नौकरी का अधिकांश हिस्सा मुरैना चेपो पर ही निकल गया ओर अब फिर वह किसी भी तरह से मुरैना ही अपना तबादला चाहते है जिसके लिए वह राजनीतिक एप्रोच भी लगाने में लगे हुए है अब उनकी यह एप्रोच कितनी कारगर साबित होती है यह तो सूची आने के बाद ही पता चल सकेगी।

