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पुतिन वाले प्लान को लेकर लेबनान में घुसी इजरायली सेना, हिज्बुल्लाह के खात्मे के लिये नेतन्याहू ने चली यह चाल

अमेरिका

नई दिल्ली. इजराइल के बारे में कहा जाता है िकवह अपने दुश्मनों का पीछा कयामत तक करता है। हमास की कमर तोड़ने के बाद अ बवह हिज्बुल्लाह के सफाये में लगा है। यही वजह है कि लेबनान में हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर हवाई हमलों के बाद अ बवह दक्षिणी लेबनान में ग्राउण्ड ऑपरेशन में जुटा है। हिज्बुल्लाह के सफाये के लिये नेतन्याहू रूसी राष्ट्रपति पुतिन के डोनबास प्लान को फॉलो कर रहे हैं। लेकिन यह प्लान क्या है? लेबनान में इजरायली सेना के ग्राउंड ऑपरेशन को इजरायल की नेशनल सिक्योरिटी कैबिनेट ने हिज्बुंल्लाह के खिलाफ जंग का चौथा चरण बताया है। इजरायली सेना चौथी बार लेबनान की जमीं पर दाखिल हुआ है। इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के करीब 30 गांवों को इलाका छोड़कर जाने का अल्टीमेटम दिया है।

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क्या है पुतिन वाला प्लान नेतन्याहू का प्लान
ठजरायल ने ठान लिया है कि वह हिज्बुल्लाह का पूरी तरह से सफाया कर देगा। यही सोचकर इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने हिज्बुल्लाह कि ठिकानों पर हवाइ्र हमले करने के साथ-साथ ऑपरेशन भी शुरू किया है। वह हिज्बुल्लाह को लगातार घेर रहा है। नेतन्याहू समझ चुके हैं। कि हसन नसरूल्लाह के खात्मे के बाद हिज्बुल्लाह के पास अभी कोई ठोस नेतृत्व नहीं है। इसका लाभ उठाते हुए इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में दाखिल होने का फैसला लिया है। लेकिन ऐसे में सवाल है कि दक्षिणी लेबनान ही क्यों।
पुतिन का प्लान क्या डोनबास वाला
2022 में जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था। राष्ट्रपति पुतिन उसी वक्त समझ गये थे कि यूक्रन को पटखनी देनी है तो डोनबास को यूक्रेन से अलग करना होगा। इस रणनीति के तहत पुतिन ने पूर्वी यूक्रेन के डोनबास के दो इलाकों डोनेत्सक और लुहांस्क को एक देश के तौर पर मान्यता दे दी है। इन पर 2014 के अलगाववादियों का कब्जा था।
डोनबास पूर्वी यूक्रेन में पड़ता है। यही की ज्यादातर आबादी रूसी भाषा बोलती है। इसलिये रूस इसे यूक्रेन से अलग करना चाहता था। डोनबास में 2014 से ही रूस समर्थित अलगाववादी और यूक्रेनी सेना के बीच संघर्ष चल रहा था। पुतिन कई बार कह चुके थे कि डोनबास पर कब्जा करना उसका मकसद था क्योंकि वह इस पर कब्जा कर यूक्रेन को मनोवैज्ञानिक तौर पर भी चोट पहुंचाना चाहता था।

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