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पीडित की शिकायत को पूरी संवेदशीलता के साथ सुनना चाहिए- न्यायमूर्ति रोहित आर्या


ग्वालियर आज ट्रिपल आईटीएम कॉलेज ग्वालियर के ऑडिटोरियम में ग्वालियर एवं चम्बल जोन पुलिस द्वारा उप निरीक्षक से ऊपर स्तर के पुलिस अधिकारियों के लिये Behavioural and Attitudinal change in Policing and enhancing Investigative skills  विषय पर 2 दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अथिति ग्वालियर उच्च न्यायालय खण्डपीठ प्रशासनिक न्यायमूर्ति रोहित आर्या, द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्प एवं दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस कार्यशाला में विशिष्ठ अतिथि के रूप में न्यायमूर्ति आनंद पाठक, न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया एवं एडीजीपीए.सॉंई मनोहर, उपस्थित रहें। सर्वप्रथम एडीजीपी ग्वालियर जोन डी.श्रीनिवास वर्मा द्वारा मुख्य अतिथि को पुष्पगुच्छ प्रदान कर उनका स्वागत किया गया।


कार्यशाला में उपस्थित अतिथियों के स्वागत उपरान्त एडीजीपी ग्वालियर द्वारा आयोजित कार्यशाला की कार्ययोजना से सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों को अवगत कराया। तद्उपरान्त पुलिस महानिदेषक मप्र भोपाल सुधीर सक्सेना द्वारा कार्यशाला से वर्चुअली जुड़कर ग्वालियर एवं चम्बल जोन पुलिस के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि यह वर्कशॉप अपराध पुलिस अधिकारियों के लिये अपराध विवेचना में मील का पत्थर साबित होगी। अपने उद्बोधन में उन्होने यह भी कहा कि हम जनता में कानून का पालन कराने वाली एक इकाई हैं और हमार पहला कर्तव्य कानून व्यवस्था को बनाये रखना एवं अपनी विवेचना से पीढि़तों को न्याय दिलाना है। कोविडकाल के बाद आने वाले त्यौहारों में एकाएक जनमानस की भीड़ में बृद्वि हुई है। इसके बावजूद भी पुलिस द्वारा अपनी ड्यूटी को पूर्णनिष्ठा से संपादित किया गया है। ग्वालियर एवं चम्बल जोन कानून व्यवस्था की दृष्टि से सदैव ही संवेदनषील रहा है इसके बाद भी ग्वालियर एवं चम्बल जोन पुलिस द्वारा हाल ही में सम्पन्न हुए पंचायत एवं नगरीय निकाय चुनावों में भी पुलिस द्वारा अपनी उत्कृष्ठ कार्य क्षमता के परिचय देते हुए शांतिपूर्ण निर्वाचन की प्रक्रिया को सम्पन्न कराये हैं इसके लिये ग्वालियर-चम्बल जोन पुलिस को मैं बधाई देता हूॅं।
डीजीपी के उद्बोधन उपरान्त मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति रोहित आर्या ने कार्यषाला में उपस्थित पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि पुलिस, कानून एवं जनता के बीच में एक कड़ी का काम करती है इसलिए पुलिस को जनता से हमेषा सहनुभूतिपूर्वक व्यवहार करना चाहिए। यदि कोई पीडि़त थाने में अपनी षिकायत लेकर आता है तो सर्वप्रथम हमें उसकी षिकायत को पूरी संवेदषीलता के साथ सुनना चाहिए एवं विधि सम्मत त्वरित कार्यवही हेतु थाने से किसी अधिकारी या पुलिसकर्मी को पीडि़त के बताये घटना स्थल पर रवाना कराना चाहिए। इस प्रकार आप जनता के बीच में पुलिस की छवि को और अधिक उन्नत बना सकेंगे। आधुनिक परिवेष को दृष्टिगत रखते हुए पुलिस को भी अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव लाने की आवष्यकता है। इस हेतु पुलिस अधिकारियों के लिये प्रषिक्षणों एवं कार्यषालाओं का आयोजन किया जाना चाहिएयह कार्यशाला अपने आप में एक नई पहल है और मैं चाहता हॅू कि पुलिस द्वारा भविष्य में भी इस प्रकार की कार्यषालाओं का आयोजन कराया जाना चाहिए।
कार्यषाला में उपस्थित विषिष्ट अतिथि न्यायमूर्ति आनंद पाठक ने उपस्थित प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि पुलिस को ड्यूटी के दौरान मिलने वाली छोटी से छोटी षिकायत अथवा सूचना को गंभीरता से लेते हुए उस पर कार्यवाही करना चाहिए क्योंकि कभी-कभी हमारे द्वारा छोटी-छोटी षिकायतों अथवा सूचनाओं पर की गई कार्यवाहियां किसी बड़े अपराध को घटित होने से रोक देती हैं। प्रत्येक पुलिस अधिकारी को स्वयं की वर्दी पर गर्व होना चाहिए क्योंकि इस वर्दी ने ही आपको जनता की निःस्वार्थ सेवा करने का अवसर प्रदान किया है।
प्रशिक्षण कार्यशाला में एडीजीपी श्री ए.सॉंई मनोहर,भापुसे द्वारा प्रशिक्षण कार्यशाला में उपस्थित सभी प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि विवेचना पुलिस प्रणाली का एक महत्वपूर्ण अंग है थाने की कार्यप्रणाली में विवेचकों का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान होता है इसलिए हमे अपनी विवेचना का स्तर उच्च कोटि का रखना चाहिए ताकि हम अपराधी को माननीय न्यायालय से दण्ड दिलवा सकें। इसके साथ ही विवेचना में साक्ष्य संकलन महत्वपूर्ण बिन्दु है। एक पुलिस अधिकारी का कर्तव्य होता है कि वह कानून की हद में रहकर आमजन को कानून का पालन कराये। वर्तमान परिवेष में जिस प्रकार के अपराध घटित हो रहे हैं उनमें विवेचना के दौरान भौतिक साक्ष्यों के साथ-साथ डिजीटल साक्ष्यों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए प्रत्येक विवेचक को किसी भी घटना की सूचना मिलने पर तत्काल घटना स्थल पर पहुंचना चाहिए एवं फौरेसिंक टीम की मदद से अधिक से अधिक भौतिक एवं डिजीटल साक्ष्य को एकत्रित करना चाहिए।
डॉ. शेखर शैषाद्री, मनोचिकित्सक द्वारा कार्यषाला में उपस्थित प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि पुलिस की कार्यप्रणाली बहुत ही जटिल है, यह ऐसा विभाग है जहां पर कभी-कभी आपको 24 घण्टे अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना पड़ता है जिस बजह से होने वाले मानसिक तनाव का असर आपके व्यवहार पर भी नजर आता है, जिसका दुष्परिणाम यह होता है कि आम तौर पर फरियाद लेकर आने वाला पीडि़त व्यक्ति आपके मानसिक तनाव का षिकार हो जाता है जिसका सीधा असर पुलिस की छवि पर भी पड़ता है।

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