पीटीएस में नव आरक्षकों के 14 साल सिलेबस में होगा बदलाव, ड्रोन ऑपरेटिंग और एआई तकनीक में होगे दक्ष-राजाबाबू सिंह
ग्वालियर. एमपी पुलिस में आरक्षकों की ट्रेनिंग सिलेबस में 14 वर्षो के बाद बड़ा बदलाव लेकर आ रही है। अब पुलिस अंग्रेजों के जमाने की डंडा मार पुलिस नहीं बल्कि तकनीकी रूप से पूरी तरह दश होगी। नये ट्रेनिंग माड्यूल में साइबर अपराध से निपटने से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलीलेंस, ड्रोन ऑपरेटिंग, साइबर फोेरसिंक को भी शामिल किया गया है। प्रदेश के गवालियर स्थित पीटीएस तिघरा के अलावा इन्दौर, भोपाल, उज्जैन, रीवा, उमरिया, पचमढ़ी, सागर, भौंरी स्थित पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में मई से प्रदेश के 4500 नव आरक्षकों को नये माड्यूल के अनुसार प्रशिक्षित किया जायेगा। मप्र पुलिस के आरक्षकों के ट्रेनिंग सिलेबस में 14 साल बाद बड़ा बदलाव। एडीजी राजाबाबू सिंह ने आते ही किया बदलाव जो मील का पत्थर साबित होगा। अब आरक्षको को ट्रेनिंग में ही एआई, साइबर फोरेंसिक, ड्रोन ऑपरेटिंग के लिए ट्रेंड और साइबर अपराध से निपटने में सक्षम बनाया जाएगा । मई माह से यह पाठ्यक्रम नव आरक्षकों की ट्रेनिंग में लागू हो जाएगा। प्रदेश भर के पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में अगले माह से 4500 नव आरक्षकों की ट्रेनिंग शुरू होगी
14 साल के बाद सिलेबस में होगा बदलाव
उल्लेखनीय है कि 14 वर्षो के बाद आरक्षकों के सिलेबस में ट्रेनिंग माड्यूल में बदलाव होने जा रहा है। इससे पहले 2011 में ट्रेनिंग माड्यूल बदला गया था। एडीजी ट्रेनिंग राजाबाबू सिंह ने बताया है कि लगातार बदले साइबर अपराध जितनी बड़ी चुनौती आम जनताके लिये है। उतना ही पुलिस के लिये भी है। ऐसे में आरक्षकों को साइबर अपराध की चुनौतियों, उनके स्वरूप, उनसे निपटने तथा जांच-पड़ताल मके तरीकों के साथ ही आधुनिक तकनीकी एआई, ड्रोन ऑपरेटिंग और साइबर फोरेंसिक की ट्रेनिंग दी जायेगी।
9 महीने की होती है ट्रेनिंग
मध्यप्रदेश पुलिस में आरक्षकों की ट्रेनिंग 9 महीने की होती है। इसमें साढे चार महीने के 2 सेमेस्टर होते है। इसके बीच में 7 दिन का गैप होता है। इन्हें तैनात किया जाता है। यहां आपको बता दें कि अभी ग्वालियर 424 नव-आरक्षकों की ट्रेनिंग चल रही है। अब आगामी समय में 4500 नव आरक्षकों की ट्रेनिंग होगी इनको 8 पीटीए में बांटा जायेगा। मई में यहां 800 नव आरक्षक ट्रेनिंग के लिये आने वाले हैं।
भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) जगह अब भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) ने ले ली है। इसी तरह दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की जगह अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) लागू हो चुका है। ऐसे में पुलिस आरक्षकों को नये कानून के बारे में प्रशिक्षित किया जायेगा। नव ’आरक्षकों को उनके ट्रेनिंग माड्यूल में ही नये कानूनों की जानकारी दी जायेगी।
2011 के बाद आरक्षकों की ट्रेनिंग का माड्यूल बदलेगा। इसके माध्यम से पुलिस बल को न सिर्फ शारीरिक रूप से मजबूत किया जायेगा। बल्कि तकनीकी रूप दक्ष भी किया जायेगा। यह समय की आवश्यकता है। -राजाबाबू सिंह, एडीजी, ट्रेनिंग, एमपी पुलिस
– 14 सालों के बाद बदला मप्र पुलिस के आरक्षकों का ट्रेनिंग माड्यूल
-4500 नव आरक्षकों को मई से तकनीकी में किया जायेगा दक्ष
नव आरक्षकों के लिये होगा जीरो वीक
अब आने वाले 4500 नव आरक्षकों के लिये जीरो वीक का प्रावधान किया गया है। इन्हें एकदम ट्रेनिंग नहीं हुए बल्कि नव आरक्षकों को धीरे-धीरे मुख्य प्रशिक्षण में लाने से पहले छोटी-छोटी ड्रिल और हल्का प्रशिक्षण एक सप्ताह देने के बाद ही मुख्य प्रशिक्षण में शामिल किया जायेगा। जिससे यह किसी प्रकार इन्जुयरी से बचे रहे।
र्स्पोट्स इनज्युरी प्रिवेंशन सेंटर में होगी ट्रेनिंग
प्ुलिस प्रशिक्षण शाला में प्रशिक्षण देने वाले 8 चीफ ट्रेनिंग इंस्पेक्टर (सीटीआई) को ग्वालियर के टेकनपुर स्थित र्स्पोट्स इनज्युरी प्रिवेंशन सेंटर में 3 दिवसीय प्रशिक्षण में ट्रेनिंग लेने के लिये भेजा जायेगा इसके बाद इनको मध्यप्रदेश के 8 पुलिस प्रशिक्षण शाला में भेजा जायेगा।

