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डोनाल्ड ट्रम्प के टैरिफ से भारत के किसानों के भी मुश्किलें बढ़ायेगा, अमेरिकी खेतिहरों के लिये डोनाल्ड ट्रम्प का अभियान किनकी बढ़ेगी मुश्किलें

नई दिल्ली. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 3 ऐसे फैसले लिये हैं जिनका यू ंतो संबंध दूसरों से अधिक देशों से हैं। लेकिन देर-सबेर भारत भी इसक अगसर से अछूता नहीं रहने वाला है। पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के 3 फैसले क्या है। इसे जानना है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के जिस फैसले से भारत पर सीधे असर पड़ सकता है। वह है कृषि उत्पादों पर टैरिफ लगाने का फैसला है।
डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने देश के किसानों को संबोधित करते हुए उन्हें अमेरिका का महान किसान बताया है। डोनाल्ड ट्रम्प ने किसानों से कहा है कि वह भारी कृषि उत्पाद बनाना और पैदा करना शुरू कर दें। क्योंकि अगले माह 2 अप्रैल से बाहर से आने वाले प्रॉडक्ट पर टैरिफ बढ़ाया जायेगा। गौरतलब है कि ट्रम्प का यह बयान कृषि क्षेत्र में अमेरिका को आत्मनिर्भर बनाने के इरादे से दिया गया है।
1.अगर एग्री प्रोडक्ट पर टैरिफ बढ़ाते हैं ट्रंप…
अगर ट्रंप बाहर से आने वाले कृषि उत्पाद पर टैरिफ बढ़ा देते हैं तो ये प्रोडक्ट अमेरिका में महंगे हो जाएंगे. बता दें कि अमेरिका भारत को बड़ी मात्रा में कृषि उत्पादों का निर्यात करता है. भारत अमेरिका को बासमती चावल, शुगर, कॉटन, मसाला और चाय जैसे कृषि उत्पाद निर्यात करता है. अगर अमेरिका बाहर से आने वाले कृषि उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाता है, तो भारत का बासमती चावल, मसाले और चाय अमेरिका में महंगे हो जाएंगे. अमेरिकी व्यापारी इन प्रोडक्ट को भारत से मंगाना कम कर दें अथवा बंद कर दें.
भारत के सामने दिक्कत यह है कि अमेरिका भारत के एग्री प्रोडक्ट का बड़ा बाजार है।  2023-24 के दौरान अमेरिका को भारत का कृषि निर्यात 5.19 बिलियन डॉलर से अधिक रहा, जो पिछले वर्ष के 5.22 बिलियन डॉलर से थोड़ा कम है. भारत ने अप्रैल-जुलाई 2024 के दौरान अमेरिका को 90,568 टन बासमती चावल निर्यात किया गया, जिसकी कीमत 116.14 मिलियन अमेरिकी डॉलर थी। यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 42% के इजाफे को दिखाता है. अमेरिका भारत के बासमती चावल का चौथा बड़ा खरीदार है।
हालांकि भारत अमेरिका से बड़ी मात्रा में एग्री प्रोडक्ट और सूखे मेवे, फल भी मंगाता है. 2023 में ये आंकड़ा 1.84 अरब डॉलर था। इस लिहाज से अगर भारत भी अगर इन प्रोडक्ट पर जवाबी टैरिफ बढ़ाता है तो इससे ये उत्पाद भारत के बाजार में महंगे हो सकते हैं. गौरतलब है कि टैरिफ व्यापार संरक्षण का एकतरफा हथियार नहीं है. इससे अमेरिका को भी महंगाई का सामना करना पड़ेगा।
2. मेक्सिको और कनाडा पर ट्रंप ने बढ़ाए टैरिफ
ट्रंप ने दूसरे फैसले के तहत अपने दो पड़ोसियों मेक्सिको और कनाडा पर टैरिफ बहुत बढ़ा दिया है. अब इन देशों से सामान मंगाने पर 25 फीसदी टैरिफ देना पड़ेगा. यानी कि अगर अमेरिका का कोई व्यापारी कनाडा अथवा मेक्सिको से 100 रुपये का सामान आयात करता है तो उसे 25 रुपये अतिरिक्त देना पड़ेगा. यही 25 रुपये टैरिफ है. इसकी वजह से अमेरिकी व्यापारियों को इन दोनों ही देशों से सामान आयात करना महंगा पड़ेगा और इसकी वजह से अमेरिका में आयात की जाने वाली चीजें महंगी हो जाएंगी. यूं तो ये तो देशों के बीच व्यापार का मामला है लेकिन अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में सभी देश एक दूसरे से जुड़े होते हैं. हालांकि ट्रंप का ये कदम भारत के लिए अवसर हो सकता है.मेक्सिको और कनाडा अमेरिका को ऑटोमोबाइल, ऑटो पार्ट्स, मशीनरी, ऊर्जा उत्पाद (तेल और गैस) और कृषि वस्तुओं जैसे सामान की आपूर्ति करते हैं. टैरिफ लगने से ये सामान अमेरिकी बाजार में महंगे हो जाएंगे. इसका एक नतीजा यह भी होगा कि अमेरिकी बाजार में भारतीय प्रोडक्ट अधिक कॉम्पीटिटिव हो जाएंगे।
अमेरिका भारत के ऑटो कॉम्पोनेंट का एक बड़ा बाजार है. यदि मेक्सिकन ऑटो पार्ट्स अमेरिका में महंगे हो जाते हैं तो भारत बड़ा हिस्सा हासिल कर सकता है. हालांकि, भारत को भी सावधान रहना होगा, क्योंकि ट्रंप ने “रेसिप्रोकल टैरिफ” की बात की है, यानी अगर भारत अमेरिकी वस्तुओं पर ऊंचे शुल्क लगाता है, तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई कर सकता है।
3. अमेरिका ने यूरोप को रोकी सैन्य मदद
ओवल ऑफिस में यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ बकझक के बाद अमेरिकी सदर डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन को मिलने वाली अमेरिकी सैन्य सहायता पर रोक लगा दी है. अमेरिकी इमदाद (चंदा) के बगैर यूक्रेन कितने देर तक रूस के सामने टिक पाएगा ये देखना दिलचस्प होगा. लेकिन सवाल है कि इस जंग से भारत कैसे प्रभावित होगा. ट्रंप के इस फैसले से रूस को रणनीतिक बढ़त मिल सकती है, हालांकि यूरोप ने यूक्रेन को मदद देने का ऐलान किया है, लेकिन फौरी तौर पर ट्रंप के इस फैसले से दुनिया भर में एनर्जी और फूड सप्लाई चेन प्रभावित हो सकता है.अगर यूक्रेन-रूस वॉर खात्मे की ओर बढ़ता है तो यूरोप में एनर्जी और गैस सप्लाई में स्थिरता आ सकती है. इसके अलावा यूक्रेन एक प्रमुख अनाज निर्यातक है, इसे दुनिया का ‘ब्रेडबास्केट’ कहते हैं. युद्ध के कारण पहले ही यूरोप में खाद्य कीमतों में उछाल आया है. युद्ध की समाप्ति महंगाई से जूझ रहे यूरोप के राहत की खबर ला सकती है।
गौरतलब है कि रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से चल रहे युद्ध में भारत हमेशा से शांति का पक्षधर रहा है. भारत ने कहा है कि वह इस मामले में तटस्थ नहीं है बल्कि शांति चाहता है. अगर ट्रंप के मदद रोकने के बाद रूस इस जंग में भारी पड़ता है तो रूस के जंगी खर्चे कम होंगे, उसकी इकोनॉमी सुधर सकती है. इसका भारत के लिए इसका फायदा ये होगा कि भारत को रूस से सस्ता कच्चा तेल हथियार, उर्वरक, और ऊर्जा संसाधन मिलते रहेंगे. रूस की मजबूत स्थिति भारत के लिए ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में एक भरोसेमंद सहयोगी जैसी रहेगी।

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