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जिस्म पर लगे घाव आदमी की ताकत का सबूत नहीं होते जनाब, ताकत कहीं और से आती है…

शहीद भगत सिंह और सुखदेव सहित कई क्रांतिवीरों की विचारधारा से गूंज उठा आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर का परिसर
ग्वालियर । भगत सिंह और सुखदेव बैठे हुयें हैं। दोनों में वार्तालाप का दौर चल रहा है। भगत सिंह कहते हैं जिस्म पर लगे घाव आदमी की ताकत का सबूत नहीं होते जनाब। ताकत कहीं और से आती है। खून बहना कोई बड़ी बात नहीं है, वो अपना हो या सामने वाले का। बड़ी बात ये है कि जिस्म से टपकती हुई एक बूंद आने वाली नस्ल के सारे के सारे खून में आग लगा सकती है या नही। इंसानी जिंदगी बहुत कीमती होती है। यह संवाद जैसे ही आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के उस्ताद अलाउद्दीन खान सभागार में गूंजे तो मौके पर मौजूद दर्शक और युवाओं में जोश भर गया और देखते ही देखते पूरा सभागार इंकलाब जिंदाबाद नारों से गूंज उठा।
मौका था आईटीएम परफॉर्मिंग आर्ट्स क्लब की ओर से संजय सिंह जादौन के निर्देशन में पीयूष मिश्रा द्वारा लिखित ‘गगन दमामा बाज्यो‘ नाटक के मंचन का। इस मौके पर आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के संस्थापक कुलाधिपति श्री रमाशंकर सिंह, कुलाधिपति श्रीमती रूचि सिंह, सम-कुलाधिपति डॉ. दौलत सिंह चौहान, प्रभारी कुलपति प्रोफेसर डॉ. एसएन खेड़कर, कुलसचिव डॉ ओमवीर सिंह, डॉ. मनोज मिश्रा सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, डीन, प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर के अलावा ग्वालियर शहर से आये गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में युवा व छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
‘तू आज से भिड़ जा, बाकी देख लेंगे‘
मंचन के दौरान शहीद भगत सिंह और सुखदेव सहित कई क्रांतिवीरों की विचारधारा की गूंज सुनाई देती रही। ‘गगन दमामा बाज्यो’ गुरु ग्रंथ साहिब की एक सूक्ति है जिसका अर्थ है, ‘तू आज से भिड़ जा, बाकी देख लेंगे’। यह नाटक दरअसल शहीद भगत सिंह के संघर्ष की दास्तान है। बेशक भगत सिंह इस धरती पर अधिक समय तक जीवित नहीं रहे, पर वे हर भारतीयों के दिलों में आज भी जिंदा हैं। इस नाटक के माध्यम से संदेश दिया गया कि शहीद भगत सिंह ने आज के हिंदुस्तान की कल्पना कर ली थी। इस प्रस्तुति में आईटीएम परफॉर्मिंग आर्ट्स क्लब कलाकारों ने जिस गंभीरता और जीवंतता के साथ पात्रो को प्रस्तुत किया वह निर्देशक और कलाकारों के सुंदर तालमेल का एक अनुपम उदाहरण था। सभी कलाकारों ने पात्रों को जीवंत करके मंच पर बखूबी प्रस्तुत किया। इसी तरह किसी भी नाट्य मंचन में ध्वनि और प्रकाश का बहुत अधिक महत्व होता है। जिसे बखूबी प्रस्तुत किया गया।
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है…
आईटीएम ग्वालियर में आईटीएम परफॉर्मिंग आर्ट्स क्लब द्वारा प्रस्तुत एक घंटा 90 मिनट के मंचन के दौरान भगत सिंह, शिवराम हरि राजगुरु, सुखदेव थापर के जीवन के संस्मरण दिखाने की कोशिश की गई। सन् 1919 से लेकर 1931 तक के समय कि कुछ घटनाएं जैसे की जालियांवाला बाग हत्याकांड, भगत सिंह की निजी जिंदगी के कुछ पहलु, काकोरीकांड, सांडर्स की हत्या आदि मंचन के दौरान प्रभावी एवं कुशल संयोजन देखने को मिला। नाटक के दौरान लाला लाजपत राय की मौत की खबर सुनकर वह जनरल डायर को मारने का प्लान बनाते हैं और फिर असेंबली में खुद को पकड़वाकर जेल में अनशन पर बैठ जाते हैं। कहानी आगे बढ़ती है और अंत में अंग्रेजों द्वारा भगत सिंह को फांसी दे दी जाती है। नाटक में ‘सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है…‘ और ‘मेरा रंग दे बसंती चोला‘ जैसे देशभक्ति के गीतों ने दर्शकों को जोश से भर दिया।
कलाकारों ने किया जीवंत अभिनय
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में आईटीएम परफॉर्मिंग आर्ट्स क्लब द्वारा प्रस्तुत ‘गगन दमामा बाज्यो‘ नाटक के मंचन में मंच प्रबंधक कृष्ण गोयल, सहायक निर्देशक अनुज यादव, मंच निर्माण प्रांजल राजावत, वस्त्र विन्यास सुजल यादव, अभय राणा, प्रॉपर्टीज तनिष गोयल, तनिष्क व्यास, आरजु सेंगर, पोस्टर एवं राइटअप सेजल गोयल, सुयश श्रीवास्तव, म्यूजिक ऑपरेटर दिव्यार्थ झा, सूत्रधार डायलॉग्स रिटन बाय सुयश श्रीवास्तव, क्रतेन्द्र सिंह सूर्यवंशी (हारमोनियम-गायन), पुनीत शर्मा (गायन), कृष्णा नागोरी (तबले पर), संजय सिंह जादोन (रिद्म), अजय सोनी (बांसुरी पर), दिव्यार्थ (गायन), प्रकाश संचालन रमन रावत, सूत्रधार सुयश श्रीवास्तव और सौम्या भदौरिया रहे।
इन कलाकारों ने निभाई क्रांतिकारियों की भूमिका
भगत सिंह की भूमिका में मोहन श्रीधर और अभय राणा रहे। सुखदेव की भूमिका में अनुज यादव इसी तरह शिवराम हरि राजगुरु- शौर्य प्रजापति, प्रांजल सिंह राजावत (मार्कण्ड, जज, ऑफिसर), सुजल यादव( जयगोपाल, वकील, ऑफिसर), सौरव राजपूत (मुइन, शिव वर्मा), शांतनु गुप्ता (अश्फाक़ुल्लाह खान, जतीन्द्रनाथ), तनिश गोयल (रामप्रसाद बिस्मिल, जज, ऑफिसर), तनिष्क़ व्यास (किशन सिंह), कृष्णा गोयल (चंद्रशेखर आज़ाद, जल्लाद), अन्वेश सिसोदिया (अब्दुल अजीज़, ऑफिसर), सेजल गोयल (प्रेमिका), हर्षित कुमार (अजय), विवेक चतुर्वेदी (भागवती भाई, फनीन्द्रनाथ घोष), वैष्णवी सिसोदिया (मां विद्यावती), रत्ना परिहार (दुर्गा भाभी), हर्ष प्रताप सिंह भदौरिया (जयदेव कपूर), दिव्यांशु शर्मा (यशपाल), उपेंद्र तोमर (बटुकेश्वर दत्त), गौरव प्रजापति (मुकुन्दी लाल, ऑफिसर), नमन प्रजापति (रोशन सिंह), सत्यम (डान्सर, क्रांतिकारी), कार्तिकेय आचार्य (दुनिचन्द, लालाजी) की भूमिका में रहे। वहीं मंच के पीछे के कलाकार संभव गुप्ता, ऋषभ बाथम, अभिषेक सिंह बघेल, दुष्यंत यादव, आरज़ू सेंगर ने बखूबी अपने अभिनय का परिचय दिया।

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