ग्वालियर में स्ट्रीट डॉग का आतंक, सुबह की सैर करने वाले हाथ में डंडा लेकर निकलते हैं, बुजुर्गो ने घर में स्वयं को किया कैद

ग्वालियर पिछले 20 दिनों में 3 मासूम बच्चों पर कुत्तों के झुण्ड द्वारा हमला करने के बाद से दहशत का वातावरण बना हुआ है। सुबह और शाम की सैर पर निकलने वाले लोग हाथ में डण्डा, हॉकी या अन्य छडी लेकर निकल रहे है। यदि रास्ते में कहीं कुत्तों का झुण्ड दिखाई देता है तो वॉक पर निकलने वाले अपना रास्ता ही बदल लेते हैं। स्ट्रीट डॉग आये दिन यहां लगभग 100 लोगों पर हमला कर चुके हैं।
यह दहशत शहर की अधिकतर पॉश कॉलोनी में देखने को मिल रही है। विशेषकर कलेक्ट्रेट कार्यालय के पास पॉश टाउनशिप एमके सिटी के लोग स्ट्रीट डॉग से दहशत में है। यहां 70 वर्ष से ज्यादा उम्र के कुछ बुजुर्गो ने सुबह और शाम के समय अकेले घूमना तक बन्द कर दिया है। एक दिन पहले मंगलवार नगर निगम के कंट्रोल रूम में स्ट्रीट डॉग को पकड़ने के लिये 66 कॉल आये। लेकिन अमला दिन भर में सिर्फ एक डॉग ही पकडा जा सका।
ग्वालियर में सड़कों पर घूमने वाले आवारा कुत्तों का आतंक इतना बढ़ गया है कि निचली बस्तियों, गली-मोहल्लों के साथ-साथ शहर के पॉश इलाके, कॉलोनी, टाउनशिप के लोग भी डॉग बाइट के शिकार हो रहे हैं। डॉग बाइट के शिकार होने वाले 70 फीसदी लोग बच्चे व बुजुर्ग हैं। ग्वालियर शहर में बीते 20 दिन में तीन मासूम बच्चों को बुरी तरह सड़क पर घूमने वाले आवारा कुत्तों ने नोच डाला। तीनों बच्चों की उम्र 6 से 7 साल है। इनमें से एक की हालत बेहद नाजुक थी। स्ट्रीट डॉग की दहशत इस तरह है कि कलेक्ट्रेट ऑफिस स्थित एमके सिटी में रहने वाले लोग अपने घर के बाहर निकलने से भी डर रहे हैं। यदि अपने आप को फिट रखने के लिए यहां रहने वाले महिला-पुरुष सुबह सैर पर निकलते हैं तो घर से निकलने से पहले वह अपने हाथों में आवारा कुत्तों से बचने के लिए डंडे पकड़कर निकलते हैं।

