गुजरात फॉर्मूले से MP में बदलेगा सरकार का चेहरा, BJP के सर्वे में एंटी इनकम्बेंसी बड़ा फैक्टर, जीत के लिए होगी बड़ी सर्जरी
भोपाल. गुजरात के बाद भाजपा मध्य प्रदेश में बम्पर जीत हासिल करने की रणनीति पर काम कर रही है। इंटरनल सर्वे और इंटेलीजेंस की रिपोर्ट से हाईकमान को पक्का यकीन हो गया है कि अगले विधानसभा चुनाव में प्रदेश में एंटी इनकम्बेंसी से बड़ा नुकसान होने वाला है। इंतजार था तो बस गुजरात चुनाव का। वहां के रिजल्ट ने मुहर लगा दी है कि शिवराज सरकार की बड़ी सर्जरी करके ही जनता के गुस्से को कम किया जा सकता है।
सत्ता में बड़े फेरबदल की तैयारी
शिवराज कैबिनेट में 4 पद खाली हैं। इन्हें भरने की सहमति आलाकमान ने इसलिए भी अभी तक नहीं दी है, क्योंकि मध्यप्रदेश की सत्ता में बड़े फेरबदल की तैयारी है। विधायकों के कामकाज को लेकर संघ, संगठन और सत्ता के स्तर पर तीन सर्वे किए गए हैं। सिंधिया समर्थक मंत्रियों के ऊपर भी गाज गिर सकती है। गुजरात में वोटिंग के बाद बीजेपी हाईकमान ने सभी प्रदेशों के अध्यक्ष और संगठन मंत्रियों की बैठक बुलाई। केंद्रीय स्तर की इस बैठक के बाद तय हुआ है कि जिन राज्यों में अगले साल चुनाव हैं, वहां गुजरात फॉर्मूले पर अमल होगा। मध्य प्रदेश में हुए पार्टी के सर्वे की रिपोर्ट भी सौंपी गई। क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल का फीडबैक आलाकमान तक पहुंचा। सत्ता में बदलाव के लिए आलाकमान इंटेलीजेंस रिपोर्ट को भी आधार बनाएगा। इंटेलीजेंस की यह रिपोर्ट गृह मंत्रालय ने बनाई है, जिसे सीधे अमित शाह देखते हैं। सूत्रों का दावा है कि आलाकमान मध्य प्रदेश में बदलाव के लिए तीनों सर्वे के आधार पर होमवर्क पूरा कर चुका है। दिल्ली एमसीडी और हिमाचल प्रदेश के चुनाव परिणाम के बाद की परिस्थितियों पर आलाकमान की नजर है। वहां से निपटकर इसी महीने बदलाव हो सकते हैं।
CM की लोकप्रियता 25% से ज्यादा नहीं, PM की 75%
भाजपा के सूत्र बताते हैं कि 2023 में होने वाले सभी विधानसभा चुनाव पार्टी सामूहिक नेतृत्व में लड़ेगी। किसी भी राज्य में मुख्यमंत्री का नाम घोषित नहीं किया जाएगा। हालांकि, मौजूदा मुख्यमंत्रियों को चुनाव जीतने के बाद सीएम बने रहने का मौका मिल सकता है। इसकी वजह पार्टी के आंतरिक सर्वे हैं। इसमें कोई मौजूदा सीएम ऐसा नहीं है, जिसकी लोकप्रियता 25% से ऊपर हो। पीएम मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ 75% से ऊपर है।
सीएम बदलेगा, ज्यादातर मंत्री भी बदलेंगे
गुजरात की तरह भाजपा हाईकमान एग्रेसिव मोड पर जाता है तो कुछ ही दिनों में मुख्यमंत्री के साथ बड़े पैमाने पर मंत्रिमंडल में बदलाव करेगा। मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान का विकल्प ढूंढने में हाईकमान को थोड़ी मुश्किल जरूर होगी। ऐसा करके हाईकमान एंटी इनकम्बेंसी का मुद्दा ही खत्म करना चाहेगी। CM के लिए केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल, राज्यसभा सदस्य सुमेर सिंह सोलंकी, उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव के नाम पर विचार हो सकता है। सोलंकी ST वर्ग से हैं और संघ से जुड़े हैं। इस वर्ग की प्रदेश में 47 विधानसभा सीटें हैं। यादव OBC नेता है और संघ के करीबी हैं।
सीएम नहीं बदलेगा, मंत्रिमंडल बदलेगा
प्रदेश में बड़े वर्ग में शिवराज के चेहरे को आज भी स्वीकार किया जा रहा है। इसे ध्यान में रखकर मुख्यमंत्री को नहीं बदलें, लेकिन मंत्रिमंडल में बड़ा बदलाव हो। नए चेहरों को मौका मिलेगा। एससी-एसटी वर्ग के ज्यादा विधायक मंत्री बनाए जा सकते हैं। भौगोलिक क्षेत्र और जातिकरण समीकरण देखते हुए संख्या घटाई-बढ़ाई जाएगी। अभी 30 मंत्री हैं, जिनमें 10 क्षत्रिय, 8 ओबीसी, 3 एससी, 4 एसटी, 2 ब्राह्मण और 1 सिख कोटे से।
मप्र में यह भी होगा
चुनाव में चेहरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ही होगा।
मौजूदा 127 विधायकों (मंत्री भी शामिल) में करीब 65 के टिकट कटेंगे।
जहां मंत्रियों को टिकट नहीं मिलेगा वहां प्रत्याशी का नाम फाइनल करने में उनकी सहमति ली जाएगी।
कुछ सीटों पर एंटी इनकम्बेंसी कम करने के लिए मंत्री के परिवार से किसी को टिकट दिया जाएगा।
गुजरात की तरह ही नई जिम्मेदारी देने की बात कहकर आलाकमान मंत्रियों को खुद हटने की घोषणा करने के लिए राजी करेगा।
जिन विधायकों के टिकट काटे जाएंगे, उनसे भी वन-टू-वन चर्चा की जाएगी ताकि भितरघात के हालात नहीं बनें।
मप्र ने ही बताया चेहरे से फर्क पड़ता है
बीजेपी के एक सीनियर लीडर के मुताबिक चुनाव से पहले कराए गए इंटरनल सर्वे में कई मुख्यमंत्रियों के बारे में नेगेटिव फीडबैक मिला है। यही कारण है कि मोदी के चेहरे को आगे रखा जा रहा है। कुछ समय पहले अमित शाह ग्वालियर आए थे। उन्होंने कहा था कि वोट नरेंद्र मोदी के नाम पर दीजिए। चेहरे से कितना फर्क पड़ता है, इसके लिए मप्र के पिछले चुनाव को ही देखिए।

