केरल की कन्नूर विश्वविद्यालय में पढाई जायेंगी आरएसएस के विचारकों की किताबें, एसएफआई ने किया विरोध
तिरूवनंतपुरम. केरल के कन्नूर विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख विचारकों एमएस गोलवलकर, वीर सावरकर और दीनदयाल उपाध्याय की किताबों को पढ़ने की सिफारिश की गयी है। इस सिफारिश पर वामपंथी छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने आपत्ति जताते हुए सवाल खड़े किये हैं।
आरएसएस विचारकों की पुस्तकों की सिफारिश
रिपोर्ट के अनुसार यूनिवर्सिटी ने लोक प्रशासन में शुरू किये गये मास्टर कोर्स के पाठ्यक्रमों में आरएसएस के प्रमुख विचारकों की किताबें पढ़ाने के लिये यह सिफारिश की है। इन पुस्तकों को पाठ्यक्रम के तीसरे सेमेस्टर में पढ़ाया जायेगा। इस समय यह पाठ्यक्रम केवल कन्नूर जिले के तेलीचेरी के गवर्नमेट ब्रेनन कॉलेज में पढ़ाया जाता है। इस कोर्स में रवीन्द्रनाथ टैगोर, जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गांधी और अन्य महान शख्सियतों की किताबें पहले से पढ़ाई जा रही है।
एसएफआई ने फैसले पर की आपत्ति
वामपंथी छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) यूनिवर्सिटी की इस सिफारिश पर आपत्ति जताई है। एसएफआई ने जुड़े कन्नूर विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष एमके हसन ने कहा है कि इस सिफारिश को वापिस लिया जाना चाहिये। यह हायर एज्यूकेशन का मजाक बनाने जैसा है।
समाज का नुकसान किया है इन लोगों ने
एमके हसन ने कहा है कि संघ के नेताओं की किताबों को तुलनात्मक साहित्य खंड में शामिल किया गया है। जब इसे विस्तार से पढ़ाया जायेगा। तब पता चलेगा कि इन लोगों ने समाज का क्या नुकसान किया है। हम पहले ही इस पर कई दौर की चर्चा कर चुके हैं और अब हम इस पर सार्वजनिक बहस करने जा रहे हैं।

