कारम डैम फूटने के मामले में 8 इंजीनियर सस्पेंड, 15 दिन बाद जल संसाधन विभाग के अफसरों पर कार्रवाई
भोपाल. धार के कारम डैम फूटने के 15 दिन बाद सरकार ने इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की है। इसमें लापरवाही बरतने वाले जल संसाधन विभाग के 8 इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। शुक्रवार की सुबह पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी निर्माण एजेंसी और सरकार की जांच पर सवाल उठाया था। इधर शाम को सरकार ने कार्रवाई का आदेश जारी कर दिया। इससे पहले बांध निर्माण से जुड़ी कंपनियों को ब्लैक लिस्टेड किया जा चुका है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने ट्वीट कर कहा है कि जांच में बांध के निर्माण में लापरवाही सामने आने पर 8 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। जांच के बाकी तथ्य जैसे ही आएंगे, जो भी दोषी होंगे, वो छोड़े नहीं जाएंगे।
यह है पूरा मामला
कारम डैम की मिट्टी की दीवार में 10 अगस्त को पहला लीकेज सामने आया था। इसके बाद सरकार हरकत में आई। धार के 12 और खरगोन जिले के 18 गांवों को आनन-फानन में खाली कराया गया। इन लोगों को ऊंचे क्षेत्रों में शिफ्ट किया गया। सरकार ने 3 दिन की मशक्कत के बाद डैम में कट लगाकर वहां से पानी निकालने का फैसला किया। पानी निकलना शुरू हुआ तो डैम के दीवार का 20 मीटर हिस्सा भी बह गया। चूंकि लोगों को शिफ्ट कर दिया गया था, इसलिए जान का नुकसान नहीं हुआ। लेकिन लोगों के खेतों में पानी भर गया और उनके जानवर भी बह गए।
ये इंजीनियर किए गए सस्पेंड
सीएस घटोले, चीफ इंजीनियर
बांध में धांधली की शिकायत करने पर व्हिसल ब्लोअर लोकेश सोलंकी को जवाब दिया कि आप ज्यादा जानते हैं तो बांध आप ही बनवा लीजिए। घटोले को गड़बड़ियों का पूरा वीडियो भी दिया गया था।
पुरुषोत्तम जोशी, सुप्रिटेंडेंट इंजीनियर
व्हिसल ब्लाेअर लोकेश सोलंकी इनसे भी मिले, लेकिन धांधली के सबूतों पर इन्होंने भी कोई ध्यान नहीं दिया और घटिया निर्माण होता रहा।
वकार अहमद सिद्दीकी, एसडीओ :
23 सितंबर 2020 को पहली शिकायत इन्हें ही दी गई। कहा गया कि अर्थ वर्क ठीक नहीं हो रहा है। कंक्रीट की क्वालिटी भी खराब है। इन्होंने शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया।
बीएल निनामा, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर
इन्हें भी शिकायत मिली थी कि बांध के काम में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जा रहा है, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया।
विजय कुमार जत्थाप, अशोक कुमार, दशाबंता सिसोदिया और आरके श्रीवास्तव
इन चारों सब इंजीनियर की ड्यूटी थी कि वे रोजाना बांध के काम को मॉनिटरिंग करें, लेकिन इन्होंने फील्ड पर तैनात रहकर भी जिम्मेदारियों की अनदेखी की। जांच रिपोर्ट में बताया गया कि न तो कंपनियों ने अपने हिस्से का काम ठीक ढंग से किया न ही बांध के काम की निगरानी कर रहे इंजीनियरों ने इसकी ठीक ढंग से मॉनिटरिंग की।

