सफल परीक्षण-सुपर सोनिक क्रूज मिसाइल, पहाड़ों में छिपे दुश्मनों का है काल
नई दिल्ली. भारत और रूस ने मिलकर सुपरसोनिक क्रूज मीडियम रेंज मिसाइल ब्रह्मोस को विकसित किया गया हे। अग्नि के सिद्धांत पर काम करने वाली और 450 किमी की रेंज वाली इस मिसाइल में 200 किमी तक के पारंपरिक वारहेड ले जाने की क्षमता है। मिसाइल को 10.27 बजे पर आईटीआर के लांच कॉम्पलेक्स से दागा गया है। 9 मीटर लम्बी और 670 मिमी व्यास वाली मिसाइल का कुल वजन लगभग 3 टन है। यह एक जहाज से दागे जाने पर घ्वनि की गति से 14 किमी की ऊंचाई तक जा सकती है। यह एक ठोस प्रणोदक द्वारा चार्ज की जाती है और 20 किमी की दूरी पर अपना मार्ग बदल सकती है।
क्या है ब्रह्मोस इतिहास
ब्रह्मोस एयरोस्पेस को भारत के रक्षा शोध और विकास संगठन (डीआरडीओ) और रूस के एनपीओएम द्वारा संयुक्त रूप से बनाया गया है। इसका पहला सफल परीक्षण 12 जून 2001 को किया गया था। इसके लिये भारत के पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल मैन के नाम से मशहूर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और रूस के प्रथम डिप्टी डिफेंस मंत्री एनवी मिखाइलॉव ने एक अंतर सरकारी समझौते पर हस्ताक्षर किये थे।
क्या है ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल
ब्रह्मोस मिसाइल मीडियम रेंज की रेमजेट सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। जिसे पनडुब्बियों, युद्धपोतों, लड़ाकू विमनों और जमीन से दागा जा सकता है। क्रूज मिसाइल उसे कहते हैं जोकम ऊंचाई पर तेजी से उड़ान भरती है और रडार की आंख से बच जाती है। सूत्रों ने बताया कि मिसाइल पहले से ही थलसेना, नौसेना और वायुसेना के पास हैं।

