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लेटरल ‘‘नो एंट्री’’ केन्द्र ने यूपीएससी को सीधी भर्ती का विज्ञापन रोकने के लिये कहा

नई दिल्ली. यूपीएससी में लेटरल एंट्री को लेकर बहस छिड़ने के बीच मंगलवार को केन्द्र सरकार ने लेटरल एंट्री के विज्ञापन पर रोक लगाने का आदेश दिया है। इस संबंध में कार्मिक मंत्री ने यूपीएससी चेयरमैन को पत्र लिखा है।
केन्द्रीय कार्मिक मंत्री जितेन्द्र सिंह ने यूपीएससी चेयरमैन को पत्र लिखकर कहा है कि पीएम नरेन्द्र मोदी के निर्देश पर सीधी भर्ती के विज्ञापन पर रोक लगाई जाये। कार्मिक मंत्री ने पत्र कहा है कि सरकार ने यह फैसला लेटरल एंट्री के व्यापक पुर्न मूल्यांकन के तहत लिया है। प्रधानमंत्री का मानना है कि सार्वजनिक नौकरियों में सामाजिक न्यायल के प्रतिसरकार की प्रतिबद्धता होनी चाहिये। लेटरल एंट्री वाले पदों की समीक्षा किये जाने की जरूरत है। ऐसे में 17 अगस्त को जारी लेटरल एंट्री वाले विज्ञापन को रद्द कर दें। यह करना सामाजिक न्याय एवं सशक्तीकरण की दृष्टि से बेहतर होगा।
पूर्ववर्ती यूपीए सरकार पर साधा निशाना
पत्र में कहा गया है कि लेटरल एंट्री का कॉन्सेप्ट 005 में यूपीए सरकार लेकर आयी थी। सभी जानते हैं कि 2005 में लेटरल एंट्री का प्रस्ताव आया था। तब वीरप्पा मोइल्ली की अगुवाई में प्रशासनिक सुधार आयोग बना था। जिसमें ऐसी सिफारिशें की गयी थी। इसके बाद 2013 में छठे वेतन आयोग की सिफारिशें भी इसी दिशा में की गयी थी। लेकिन उससे पहले और बाद में लेटरल एंट्री के कई मामले सामने आये थे।
केंद्र सरकार के इस कदम पर विपक्ष की प्रतिक्रिया
यूपीएससी में लेटरल एंट्री के विज्ञापन पर रोक लगाने के केंद्र सरकार के आदेश पर कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि संविधान जयते ! हमारे दलित, आदिवासी, पिछड़े और कमज़ोर वर्गों के सामाजिक न्याय के लिए कांग्रेस पार्टी की लड़ाई ने भाजपा के आरक्षण छीनने के मंसूबों पर पानी फेरा है।  Lateral Entry पर मोदी सरकार की चिट्ठी ये दर्शाती है कि तानाशाही सत्ता के अहंकार को संविधान की ताकत ही हरा सकती है।  राहुल गांधी, कांग्रेस और INDIA पार्टियों की मुहिम से सरकार एक कदम पीछे हटी है। पर जब तक BJP-RSS सत्ता में है, वो आरक्षण छीनने के नए-नए हथकंडे अपनाती रहेगी. हम सबको सावधान रहना होगा।

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