मृतक को जिन्दा बता कर रहे थे, मृतक के पिता ने दूसरे अस्पताल ले जाने की बात कही तो डॉक्टरों ने बताया मृतक
ग्वालियर में निजी हॉस्पिटल का एक और कारनामा सामने आया है हॉस्पिटल के डॉक्टर्स एक्सीडेंट से मर चुके मरीज को जिंदा बताकर घंटों इलाज करते रहे। मृतक विवेक के परिजनों के हंगामा और चक्काजाम करने पर करने पर पुलिस मौके पर पहुँची और जाम खुलवाया।
वीओ-: आपको बता दें कि मृतक के परिजनों ने संभाग के सबसे बड़े सरकारी हॉस्पिटल जयारोग्य से झांसा देकर दलाल के माध्यम से निजी हॉस्पिटल में लाने का आरोप लगाया है।
लेकिन डॉक्टरों की लापरवाही के चलते विवेक की मौत हो गई, झांसी जिले के मोठ का रहने वाले विवेक रायकवार को 18 मार्च को एक्सीडेंट के बाद हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, परिजनों का आरोप है कि विवेक की मौत होने के बाद भी उसे वेंटीलेटर पर रखे रहे, जब परिजनों ने विवेक को दूसरे डॉक्टर के यहाँ ले जाने की बात कही तो आयुष हॉस्पिटल प्रबंधन ने विवेक को मृत घोषित कर दिया, मृतक के पिता के मांगे जाने पर मृतक की केस फाइल भी नहीं दिखाई गई है इस बात से कहीं न कहीं अस्पताल प्रबंधन शक के घेरे में आ रहा है।
यह है पूरा मामला
झांसी के मोठ निवासी 25 वर्षीय विवेक रायकवार ट्रेवल्स एजेंसी का संचालन करते हैं। 18 मार्च की सुबह विवेक एक्टिवा से आ रहा था तो पीछे से तेज रफ्तार वाहन टक्कर मार गया था। जिसमें वह गंभीर घायल हो गया था। झांसी से उसे ग्वालियर रैफर किया गया था। परिजन उसी शाम को घायल को लेकर जेएएच के ट्रॉमा सेंटर पहुंचे थे। अस्पताल के बाहर ही एक रोहित नाम का एजेंट मिला।
उसका कहना था कि होली के कारण जेएएच में डॉक्टर नहीं हैं। इससे अच्छा तो मरीज को आयुष मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल में भर्ती करा दीजिए। जहां सोमवार दोपहर उसे मृत घोषित कर दिया गया था। मृतक के परिजन का आरोप है कि विवेक की मौत होने के बाद भी उसे वेंटीलेटर पर रखे रहे। जब परिजनों ने विवेक को दूसरे डॉक्टर के यहां ले जाने की बात कही, तो आयुष हॉस्पिटल प्रबंधन ने विवेक को मृत घोषित कर दिया।मृतक के पिता के मांगे जाने पर मृतक की केस फाइल भी नहीं दिखाई गई है। इस बात से कहीं न कहीं अस्पताल प्रबंधन शक के घेरे में आ रहा है। इसके बाद परिजन ने हंगामा कर जाम लगा दिया।

