मप्र में नगरीय निकाय चुनाव में आरक्षण मामले पर हाईकोर्ट ने स्टे बरकरार रखा, अब सुप्रीमकोर्ट में फैसला होगा
जबलपुर. मध्यप्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव एक बार फिर लटक गया है। प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव में रिजर्वेशन को चुनौती देने वाली याचिका पर जबलपुर हाईकोर्ट ने भी स्टे को बरकरार रखा है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में फैसला होगा। नगरीय निकाय चुनाव में आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका के खिलाफ शिवराज सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। फिलहाल जो हालात हैं उससे लगता नहीं है कि जल्द चुनाव होंगे। सितंबर में इस मामले में हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में सुनवाई हुई थी। तब प्रदेश सरकार ने चार सप्ताह का समय मांगते हुए सुप्रीम कोर्ट जाने की मांग की थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने उनको समय दिया था। इसी दौरान हाईकोर्ट जबलपुर ने चुनाव में रिजर्वेशन के सभी मामले अपने पास बुला लिए थे। यहां 28 अक्टूकर को सुनवाई हुई, जिसमें स्टे बरकरार रखा गया है। फिलहाल प्रदेश के लोगों नगरीय निकाय चुनाव के लिए इंतजार करना होगा।
हाईकोर्ट ने आरक्षण प्रक्रिया पर लगाई थी रोक
हाईकोर्ट ने मार्च 2021 में दो नगर निगम, 79 नगर पालिका और नगर पंचायत के आरक्षण की प्रक्रिया पर रोक लगाने के बाद मध्य प्रदेश शासन से जवाब मांगा था। हाईकोर्ट में जवाब पेश करते हुए शासन की तरफ से कहा गया था कि संविधान के अनुच्छेद 243 और नगर पालिका अधिनियम की धारा 29 में नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायतों के जो अध्यक्ष चुने जाने हैं, उनके पदों के आरक्षण का अधिकार शासन को दिया है। अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए जो पद आरक्षित किए जाते हैं, वह जनगणना के आधार पर तय किए जाते हैं। जनसंख्या के समानुपात के आधार पर आरक्षण किया जाता है। ऐसा नहीं है कि एक पद आरक्षित हो गया है, उसे दोबारा आरक्षित नहीं किया जा सकता। महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष व नगर पंचायत अध्यक्षों के पद आरक्षित करने में कोई गलती नहीं की है। कानून का पालन करते हुए आरक्षण किया गया है। मध्यप्रदेश सरकार की तरफ से पेश की गई दलील सुनने के बाद याचिकाकर्ता मानवर्द्धन सिंह तोमर ने कहा कि आरक्षण में रोस्टर का पालन नहीं किया गया था।
अब सुप्रीम कोर्ट में होगा नगरीय निकाय चुनाव का फैसला
नगरीय निकाय चुनाव में नगर निगम, नगर पालिका व नगर पंचायत में आरक्षण की प्रकिया पर रोक लगाते हुए ग्वालियर होईकोर्ट के स्टे को जबलपुर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने भी बरकरार रखा है। अब इस मामले में प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुकी है। अब सुप्रीम में इस पूरे मामले में फैसला होना है। हालातों को देखते हुए फिलहाल यही माना जा रहा है कि फिलहाल वक्त के लिए प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव टल गए हैं। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आगे की राह बनेगी।

