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मंत्रालय में टोपी लगाकर अधिकारी-कर्मचारी कर रहे हैं काम, उपसचिव, अपर सचिव के सभी पदों पर आरक्षित वर्ग के लोग

भोपाल. मोहन यादव सरकार द्वारा कर्मचारियों अधिकारियों की पदोन्नति के लिये जारी किये गये नये नियमों के विरोध में बुधवार को  मंत्रालय में विरोध शुरू हो गया। मंत्रालय में पदस्थ अनारक्षित वर्ग के अधिकारी कर्मचारी बुधवार को कार्यालय में सरकार के पदोन्नति नियम के विरोध में स्लोगन लिखी टोपी लगाकर काम करने पहुंचे हैं। कल मंत्रालय में सामान्य, पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग के अधिकारी एक जुट होकर प्रदर्शन कर आन्दोलन की रणनीति बनायेंगे। उधर, सपाक्स (स्पीक) ने भी इस मामले को लेकर आन्दोलन की रणनीति बनाने 29 जून को बैठक बुलाई है। जिसमें सभी कर्मचारी अधिकारी संगठनों को बुलाया गया है।

मंत्रालय में पदोन्नति नियमों के विरोध में सामान्य, पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग के अधिकारियों, कर्मचारियों की मीटिंग में आंदोलन की रणनीति बनाई गई। - Dainik Bhaskar
30 जून के पहले जीएडी कर सकता है डीपीसी मीटिंग
जीएडी अफसरों ने कहा है कि विभाग जून माह में डीपीसी मीटिंग बुलाकर मंत्रालय सेवा और राजस्व से राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों के पदों के लिए डीपीसी कर सकता है। ऐसे में माना जा रहा है कि 26 जून को विभागों के साथ होने वाली चर्चा और समाधान के बाद तीस जून के पहले जीएडी विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक के जरिये सामान्य प्रशासन विभाग से संबंध रखने वाले अफसरों, कर्मचारियों के पदोन्नति पर फैसला ले सकता है।
क्या है मामला
मंत्रालय अधिकारी कर्मचारी सेवा संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक ने मंत्रालयीन कर्मचारियों अधिकारियों से कहा है कि अभी नए पदोन्नति नियमों और पुरानी व्यवस्था में पदोन्नति के 36 प्रतिशत पद आरक्षित वर्ग को मिलेंगे। इसमें 20 प्रतिशत एसटी और 16 प्रतिशत एससी वर्ग के लोग होंगे। इसके बाद अनारक्षित वर्ग के लिए जो पदोन्नति के 64 प्रतिशत पद बचेंगे उसमें भी आरक्षित वर्ग के लोग वरिष्ठता के हिसाब से आएंगे और अनारक्षित वर्ग का हक मारेंगे। उन्होंने कहा कि आरक्षित वर्ग का कोई व्यक्ति ऊंचे पद पर पहुंचता है तो लम्बे समय तक रहता है और सामान्य, पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग का अधिकारी कुछ समय के लिए ही पद पर रहकर रिटायर हो जाता है। क्या हमारा प्रदेश की और राष्ट्र की उन्नति में कोई योगदान नहीं है। क्या सामान्य और पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक वर्ग के लोग साइबेरिया से आए हैं। इस तरह की तुष्टिकरण की कार्यवाही सरकार क्यों कर रही है।
29 को संभी संगठनों की बैठक-सपाक्स
दूसरी और सपाक्स (स्पीक) के अध्यक्ष डॉ. केएस तोमर ने कहा है कि मंगलवार को मंत्रालय में हुई बैठक में वह भी शामिल हुए थे। कर्मचारियों-अधिकारियों को लोकसेवा पदोन्नति नियम 2025 के उन प्रावधानों की जानकारी दी गयी है। जो अनारक्षित वर्ग का अधिकार मारने वाले है। केएस तोमर ने कहा है कि सरकार तो अनारक्षित वर्ग की बात ही नहीं सुनना चाहती है। इसलिये आन्दोलन और न्यायालय जाने के अलावा इस वर्ग के पास कोई रास्ता नहीं बचा हे। ऐसे में 29 जून को राजधानी के नर्मदीय भवन में इस वर्ग के हितों को लेकर रणनीति बनाने सभी कर्मचारी अधिकारी संगठनों की बैठक बुलाई गयी है।

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