पूर्व कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला के बदले गये फैसले, विवादित फैसलों की होगी जांच, विरोधियों को मिला सम्मान
ग्वालियर. जीवाजी विश्वविद्यालय (Jiwaji university) में पूर्व कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला के कुलपति के पद से हटते ही सारा नजारा ही बदल गया। प्रो. संगीता शुक्ला के समय जो विवादित फैसले लिये गये थे। उन्हें पलटना शुरू हो गया है। इतना ही नहीं, प्रो. प्रोफेसर, अधिकारी, कर्मचारी थे। उनकी गतिविधियों की जांच भी कराई जायेगी। बुधवार को जीवाजी विश्वविद्यालय JU की कार्य-परिषद (EC) की बैठक में इसी तरह के कई ऐसे फैसले लिये गये हैं जो विश्वविद्यालय व उनसे जुड़े कॉलेजों में चर्चा का विषय बनने लगे हैं। खास बात यह रही कि प्रो. अविनाश तिवारी के कुलपति बनने के बाद उनकी अध्यक्षता में जीवाजी विश्वविद्यालय JU के कार्यपरिषद की यह पहली बैठक थी।
ऐसा माना जा रहा था कि प्रो. अविनाश तिवारी, प्रो. संगीता शुक्ला के पाले के हैं और वह पिछले फैसलों को नहीं पलटने देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और कार्य परिषद सदस्य जो बोलते गये उसे वह मानते गये और जता दिया कि वह वर्तमान सदस्यों सेविरोध न लेते हुए जीवाजी विश्वविद्यालय के विकास से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देंगे। बैठक में राज्यपाल कोटे के कार्य परिषद मनेन्द्र सोलंकी (मोनू), अनूप अग्रवाल तथा शिवेन्द्रसिंह राठौर भारी रहें। उनके हर विरोध व सुझाव को प्राथमिकता देकर फैसले लिये गये। यहां पर यह बताना मुनासिब होगा कि तीनों ही सदस्यों से पूर्व कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला की पटरी नहीं बैठती थी। यहां तक कि तीनों सदस्यों ने जीवाजी विश्वविद्यालय में गड़बड़ी, घोटाले के मुद्दे उठाये तो प्रो. संगीता शुक्ला ने उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव भी पास करा दिया था। बैठक में सचिव के रूप में मौजूद रहें रजिस्ट्रार डॉ. सुशील मंडेरिया ने भी कार्य परिषद के सदस्यों को महत्व दिया।
यह लिए महत्वपूर्ण निर्णय
वित्त नियंत्रक( FC ) सगीरा सिद्दी को किन नियमों के तहत आउट सोर्स के कर्मचारी, आवास और वाहन उपलब्ध कराये गये, इसके लिए उनसे जबाव मांगा है। उल्लेखनीय है कि सगीरा सिद्दीकी भी प्रो. संगीता शुक्ला की खास थीं।
स्विमिंग पूल का स्थान क्यों और किसके निर्देश पर बदला गया। बदलने से विवि को कितना आर्थिक नुकसान हुआ, इसकी जांच रिपोर्ट भी मांगी है। उल्लेखनीय है कि कुलपति ने स्विमिंग पूल का स्थान बदल दिया था। इसे लेकर काफी विवाद और घोटाले के आरोप लगे थे।
जेयू खेल विभाग के पूर्व डायरेक्टर राजेन्द्र सिंह के खिलाफ कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने आर्थिक अनियमितता की जांच के निर्देश देकर सेवानिवृत जज से जांच शुरू कराई थी। कार्यपरिषद ने इस मामले की जांच को नियमों के विरुद्ध माना और न केवल जांच कमेटी भंग कर दी बल्कि जांच को भी खत्म कर दिया। बता दें कि राजेन्द्र सिंह से प्रो. संगीता शुक्ला का काफी विवाद हो गया था। इसके बाद उनकी जांच के आदेश दिये थे।
जेयू में आउट सोर्स कर्मचारी प्रदाता फर्म मैसर्स शर्मा सिक्यूरिटी की भी जांच का निर्णय लिया। इस फर्म से कितने कर्मचारी, कब-कब लिये, किसके आदेश पर लिये, कहां-कहां लगे हैं, ऐसे ही अन्य बिन्दुओं पर जांच का जिम्मा पूर्व वित्त नियंत्रक महक सिंह और कार्यपरिषद सदस्य अनूप अग्रवाल करेंगे।
सामान्य एवं लोक प्रशासन विभाग की लाइब्रेरी को प्रो. स्वर्गीय एपीएस चौहान के नाम जाना जाये। उल्लेखनीय है कि प्रो. चौहान और प्रो. संगीता शुक्ला के बीच भी काफी तनातनी चली थी। प्रो. शुक्ला ने उन्हें हांसिये पर ला दिया था। अब कार्यपरिषद ने स्वर्गीय चौहान को सम्मान दिलाने का प्रयास किया है।
पूर्व कार्यपरिषद सदस्य केपी सिंह से भी भी प्रो. संगीता शुक्ला का छत्तीस का आंकड़ा था। प्रो. शुक्ला ने केपी सिंह की पत्नी को विवि में पढ़ाने पर रोक लगा दी थी। अब वे मानदेय पर पुनः कक्षाएं ले सकेंगी। यह निर्णय लेकर भी प्रो. संगीता शुक्ला को झटका दिया है।
प्रतिनियुक्ति की नहीं दी अनुमति
प्रो. संगीता शुक्ला जेयू में जूलोजी के प्रोफेसर है लेकिन अब उन्हें मेरठ विवि का कुलपति नियुक्त किया गया है। इस पद की जिम्मेदारी के लिए उन्हें जीवाजी यूनिवर्सिटी (JU) से प्रतिनियुक्ति की अनुमति लेना होगी। यह अनुमति केवल कार्यपरिषद ही दे सकती है। बैठक में यह मुद्दा भी शामिल था लेकिन सदस्यों कह दिया कि इस पर 17 जनवरी की बैठक में चर्चा की जाएगी। इसी तरह बहुचर्चित नर्सिगं घोटाले की जांच का मामला भी 17 जनवरी को प्रस्तावित बैठक में लाने का निर्णय हुआ।

