नही रहें प्रभात जी, 27 जुलाई की शाम 3 बजे अत्येष्टि बिहार की सीतामढ़ी में होंगी
ग्वालियर. बतौर पत्रकार के रूप में दैनिक स्वदेश से सफर प्रारंभ करने के बाद भाजपा में मीडिया प्रभारी के रूप अपनी साख बनाई और इसके बाद भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष बने, इसके बाद राज्यसभा सदस्य बनें। प्रभात झा पिछले 20 दिनों से गुरूग्राम के अस्पताल में वेंटलेटर पर थे। शुक्रवार की सुबह 4 बजकर 20 मिनट पर अंतिम सांस ली और अनंत लोक के लिये प्रस्थान कर गये। प्रभात झा जेयष्ठ पुत्र तुष्मुल झा ने बताया कि अपने पिता को बाबा के नाम से संबोधित करते थें । तुष्मुल एवं अयतन झा चाहते थे कि बाबा की कर्मस्थली मध्यप्रदेश ग्वालियर में उनकी अंत्येष्टि हो। लेकिन हमारी माता जी से कभी इच्छा जाहिर की थी कि उनकी अंत्येष्टि जन्म धरती पर एवं जहां मेरे दादा जी की अंत्येष्टि हुई थी वहीं उनकी भी अंत्येष्टि की इच्छा जाहिर की थी।
परिवार के सदस्यों ने निर्णय लिया है कि प्रभात झा की अंत्येष्टि 27 जुलाई शनिवार की शाम 3 बजे पुश्तैनी गांव बिहार के जिला सीतामढी कोरियाही में संपन्न किया जायेगा।

दिल्ली में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, डॉ. वीरेंद्र कुमार खटीक ने प्रभात झा के परिजन से मिलकर सांत्वना दी।
एक नजर प्रभात झा के जीवन पर..
प्रभात झा मूल रूप से बिहार के रहने वाले थे। उनका जन्म 4 जून 1957 को बिहार के दरभंगा के हरिहरपुर गांव में हुआ था। वे परिवार के साथ मध्यप्रदेश के ग्वालियर आ गए थे। प्रारंभिक शिक्षा के बाद प्रभात झा ने ग्वालियर के पीजीवी कॉलेज से बीएससी, माधव कॉलेज से राजनीति शास्त्र में एमए और एमएलबी कॉलेज से एलएलबी की डिग्री ली। उनकी शादी रंजना झा से हुई थी। दो बेटे हैं। बड़े बेटे तुष्मुल और छोटे अयत्न झा हैं। शादी के बाद वे पत्रकारिता करने लगे। लंबे समय तक पत्रकारिता के बाद वे राजनीति में आए और बीजेपी के सदस्य बने। 8 मई 2010 से 16 दिसंबर 2012 तक बीजेपी के मध्यप्रदेश अध्यक्ष रहे। 2008 में पहली और 2014 में दूसरी बार राज्यसभा के लिए चुने गए। उन्होंने कई किताबें भी लिखी थीं।

