दिनों दिन बढ़ रही जूनियर डॉक्टरों की तानाशाही, मरीज के अटेण्डर का दबाया गला
ग्वालियर. जूनियर डॉक्टरों की तानाशाही थमने का नाम नहीं ले रही है। बुधवार की सुबह एक हजार बिस्तर अस्पताल के सर्जरी वार्ड में भर्ती मरीज के साथ दुव्यर्वहार किया गया। मरीज की जांच नहीं कराई। बल्कि उसका मोबाइल छीन लिया और कमरे में बंद करके गला दबा दिया। इतना ही नहीं अब मरीज को धमकी दी जा रही है कि अगर वह यह बात किसी को बताई तो फिर ठीक नहीं होगा। मनीष जैन निवासी पनिहार पिछले दिन से एक हजार बिस्तर अस्पताल के सर्जरी वार्ड में भर्ती है। उसकी जांच होनी है। जिसे लेकर जूनियर डॉक्टर लगातार परेशान कर रहे है। बुधवार की सुबह मनीष की हालत जब अधिक बिगड़ी तो उसने वार्ड में मौजूद जूनियर डॉक्टर से कहा है कि जांच तो अभी तक कराई नहीं है। इलाज कैसे होगा। इसी बात पर वार्ड में मौजूद जूनियर डॉक्टर भड़क गये और मनीष का मोबाइल छीन लिया और उसे एक कमरे में बंद कर दिया। जूनियर डॉक्टरों ने मनीष का गला भी दबाया। लेकिन जैसे-तैसे वह बच गया। मनीष जैन के भाई गजेन्द्र जैन का भी पिछले 15 दिन से अस्पताल से उपचार चल रहा है। गजेन्द्र की पस पड़ गयी। दोनों भाईयों के साथ कोई है नहीं और जैसे तैसे उनका इलाज हो रहा है।
किसी को बताना नहीं, धमकी दे रहे
जूनियर डॉक्टरों की तानाशाही किसी से छिपी नहीं है। आये दिन अटेण्डरों से विवाद और मारपीट होना अब जैसे आम बात हो गयी है। प्रबंधन द्वारा किसी तरह की कार्यवाही न किये जाने से जूनियर डॉक्टरों के हौंसले बुलंद है और वह मरीज व अटेण्डरों के साथ इस तरह पेश आते हैं। जैसे ड्यूटी नहीं मरीजों का इलाज करके अहसान कर रहे है। ऐसा ही मनीष जैन के साथ हुआ। एक तो जूनियर डॉक्टरों ने उसका मोबाइल छींन कर गला दबा दिया फिर उसके बाद धमकी देने लगे कि अगर बाहर यह बात किसी को बताई तो फिर ठीक नहीं होगा । जूनियर डॉक्टरों की धमकी से मनीष जैने काफी डरा हुआ है।
चार कॉल करो तो एक बार आते हैं
मरीज के अटेण्डर व जूनियर डॉक्टरों के बीच मारपीट व विवाद के पीछे कई कारण है। वार्ड में भर्ती मरीज की हालत बिगडने पर उसके साथ आया अटेण्डर वार्ड में ड्यूटी कर रहे जूनियर डॉक्टर के पास जायेगा तो उसे यह कहकर भगा दिया जाता है। अभी काम कर रहे है। लेकिन मरीज के प्रति चिंतित अटेण्डर कर कई बार देखने की गुहार लगाता है। जिससे विवाद हो जाता है। जूनियर डॉक्टर कभी फाइल बनाने ता कभी किसी अन्य काम में व्यस्त होने का बहाना बनाकर अपनी ड्यूटी करने से बचते हैं।
सिर्फ नाम का है प्रबंधन
जूनियर डॉक्टरों की तानाशाही को हवा देने मे ंजेएएच प्रबंधन का पूरा हाथ है। विभागाध्यक्ष राउंड लगाने के बाद दोबारा झांक कर नहीं देखते है कि उनका मरीज कैसा है। मरीज को भर्ती करने के बाद सारी जिम्मेदारी जूनियर डॉक्टरों को सोंप दी जाती है। मरीज की हालत बिगड़ी तो फिर भगवान ही मालिक है कि उसका क्या होगा? प्रबंधन में शामिल डीन, अधीक्षक, सहायक अधीक्षक समेत अन्य फैकल्टी राउंड के नाम पर गये तो ठीक , नहीं गये तो ठीक।

