हेरिटेज वॉक -शनिचरा मंदिर, चंदेरी एवं वहां की साड़ी, कारीगरी की भी तारीफ
ग्वालियर- पुरातत्व पर्यटन संस्कृति परिषद् की 2 दिवसीय कार्यशाला में दूसरे दिन की शुरुआत हेरिटेज वॉक से हुई आईआईटीटीएम के नोडल अधिकारी डॉ चंद्रशेखर बरुआ जी ने वॉक को लीड किया । हेरिटेज वॉक का उद्देश्य अन्य जिलों से आए हुए प्रतिनिधियों को भी अपने जिलों में इस तरह की वॉक कराने के लिए प्रेरित करना था ।
मुरैना के सीईओ जिला पंचायत इच्छित गढ़पले ने अपने उद्बोधन में कहा की उनकी हमेशा से पर्यटन में दिलचस्पी रही है उनकी पोस्टिंग जहां भी रही है वहां पर्यटन को सराहा है। उन्होंने शनिचरा मंदिर, चंदेरी एवं वहां की साड़ी, कारीगरी की भी तारीफ की साथ ही चंदेरी के टेक्सटाइल पार्क की भी बात की । उन्होंने उन पर्यटन स्थलों पर जाने की बात की जिनको लोग काम जानते हैं एवं उन जगहों को प्रमोट करने का सुझाव दिया ।
मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड से डॉ धीरेन्द्र कुमार मिश्रा ने बताया की किस तरह डीएटीसीसी पर्यटन, संस्कृति एवं पुरातत्व विभागों में समन्वय की भूमिका निभा सकता है । इसके बाद सभी जिलों की प्रेजेंटेशन हुई जिनमे जिलों ने अपने यहां की विशेषताएं, पर्यटन स्थल, खानपान, हस्तशिल्प बताए एवं अपने जिलों में चल रहे पर्यटन से जुड़े प्रोजेक्ट्स, स्कीम्स और आगे का प्लान बताया की किस तरह वे अपने जिले में पर्यटन का विकास कर रहे हैं।
ग्वालियर में DATCC के नोडल अधिकारी अनुपम शर्मा ने ग्वालियर में पर्यटन को बढ़ाने का प्लान साझा करते हुए सलवाई की गढ़ी का जिक्र किया। ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बधावना, बेहट, धूमेश्वर, सालवई, रायपुर एवं उदयपुर का चयन किया गया है। आईआईटीटीएम से डॉ अमित तिवारी ने बताया की ग्वालियर को पर्यटन के क्षेत्र में विश्व स्तर पर माना जाता है ग्वालियर एवं आस पास के पर्यटन स्थलों को साथ मिलकर एक सर्किट बनाने की आवश्यकता है जिसमें मुरैना, दतिया, चंदेरी, ओरछा को शामिल कर पर्यटकों को एक अच्छा टूर पैकेज देना चाहिए एवं उसको प्रोमोट करने की आवश्यकता है । हमें मिलकर ग्वालियर की 2 नाइट इमेज को बदलकर बड़ा टूरिज्म प्रोडक्ट बनाने की आवश्यकता है ताकि देशी एवं विदेशी पर्यटक यहां कई दिनों तक रुकना चाहें ।

