हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना पर सख्ती, सिविल जज के आचरण की जांच, 4 माह में सौंपे जांच रिपोर्ट
ग्वालियर. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच की एकलपीठ ने अपने आदेश की अवहेलना और लापरवाही बरतने के मामले को गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट ने एक सिविल जज के आचरण की जांच कराने के निर्देश दिये है। यह मामला किसी अन्य सिविल जज को सौंपने के आदेश दिये गये है। जिसे 4 महीने के अन्दर जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिये कहा है। मामला अशोक कुमार व अन्य बनाम मीरा देवी से जुड़ा है। इसके बावजूद प्रतिवादी पक्ष द्वारा कथित रूप से विवादित भूमि पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। इसके बाद याचिकाकर्ता अशोक कुमार ने अवमानना याचिका दायर की है।
ट्रायल कोर्ट ने 4 महीने में मांगी जांच रिपोर्ट
ममले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 4 अप्रैल 2024 को ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया था कि वह जांच कर यह स्पष्ट करे कि क्या अंतरिम आदेश का उल्लंघन कर निर्माण किया गया है। ट्रायल कोर्ट को 4 माह के अन्दर जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने के लिये कहा है। पक्षकारों को 24 अप्रैल 2024 को ट्रायल कोर्ट के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश भी दिया गया था।
EE PWD से निरीक्षण रिपोर्ट तैयार कर सौंपी
इसके बावजूद ट्रायल कोर्ट ने विधिवत जांच की प्रक्रिया पूरी नहीं है। गवाहों के बयान दर्ज करने और पक्षकारों को सुनवाई का मौका देने के बजाय केवल लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के कार्यपालन यंत्री से स्थल निरीक्षण रिपोर्ट मंगाकर सीधे हाईकोर्ट को भेज दी और इतना ही नही, रिपोर्ट को प्रिंसिपल जिला एवं सत्र न्यायाधीश के माध्यम से भेजने की निर्धारित प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया गया।

