सिद्धू मूसेवाला की बरसी पर ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगे
पंजाब. मानसा की किसान मंडी में रविवार, 19 मार्च को हजारों की भीड़ जुटी। हाथों में मशहूर सिंगर सिद्धू मूसेवाला की फोटो। कई लड़के मूसेवाला की फोटो वाली टी-शर्ट पहने हुए। यहां सिद्धू की पहली बरसी मनाई गई। पिता बलकौर सिंह ने दावा किया था कि कार्यक्रम में एक लाख लोग आएंगे। इतने ही लोगों के खाने-पीने का इंतजाम था, लेकिन आए करीब 10 हजार। उनकी जांच के लिए हर तरफ पुलिसवाले और हर गेट पर 4-5 मेटल डिटेक्टर।
फिर लगने लगे खालिस्तान जिंदाबाद के नारे
बड़े से स्टेज पर शबद कीर्तन चल रहा था, तभी सिद्धू मूसेवाला की मां चरण कौर स्टेज पर आईं। साथ में पिता बलकौर सिंह। मां ने आवाज में दम भरते हुए कहा मैं तां बस तुहानू इक्को ही गल्ल पूछणा चाहूंगी के साड्डा देश अजाद है या गुलाम मैं बस तुमसे एक ही बात पूछना चाहती हूं कि हमारा देश आजाद है या गुलाम। भीड़ ने जवाब दिया ‘गुलाम’। फिर लगने लगे ‘खालिस्तान जिंदाबाद, खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे। मंच से न किसी ने भीड़ को रोका, न कोई विरोध हुआ। चरण कौर फिर कहती हैं आप्पा किसी भूलेखे चन रहिये के अस्सी तां आजाद हो गए, अस्सी तां अज्ज वी गुलाम हां हमें किसी भुलावे में नहीं रहना चाहिए कि हम आजाद हो गए, हम तो आज भी गुलाम हैं।
सिद्धू मूसेवाला की ये लाइनें एक ट्राइसिकल पर लिखी
अत नू तरक्की एथे, वेरी बनदी लेजें आखिर में आपकी कामयाबी ही, आपके अंत की वजह बनती है, सिद्धू मूसेवाला की ये लाइनें एक ट्राइसिकल पर लिखी थीं। 26 साल का एक दिव्यांग इससे मूसेवाला की बरसी में पहुंचा था। पंजाबी की लाइनों के नीचे लिखा था लीजेंड।

