सिंचाई की सभी परियोजनाओं में तेजी से कार्य किया जाए – जल संसाधन मंत्री
ग्वालियर प्रदेश के जल संसाधन, मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास मंत्री मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कहा है कि प्रदेश के अन्नदाता (किसानों) को खेती किसानी के लिये पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। प्रदेश में कृषि का रकबा बढ़े, इसके लिये विभाग हर संभव उपाय करे। प्रदेश में 33 लाख हैक्टेयर क्षेत्र को बढ़ाकर 44 लाख हैक्टेयर क्षेत्र करने की दिशा में प्रदेश सरकार कार्य कर रही है।
जल संसाधन मंत्री ने रविवार को ग्वालियर में यमुना कछार एवं राजघाट परियोजना की विस्तार से समीक्षा मुख्य अभियंता कार्यालय के सभाकक्ष में की। बैठक में मुख्य अभियंता यमुना कछार जल संसाधन विभाग आरपी झा एवं मुख्य अभियंता राजघाट परियोजना सीएल गर्ग सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
जल संसाधन मंत्री ने विभागीय समीक्षा बैठक के दौरान कहा कि ग्वालियर-चंबल संभाग में अति वर्षा (बाढ़) के दौरान जल संसाधन विभाग के बांधों और नहरों को जो क्षति हुई थी, उसको सुधारने के कार्य में विभागीय अधिकारियों द्वारा जो कार्य किया गया है और अति वर्षा के दौरान विभागीय अधिकारियों ने अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा से किया है, इसके लिये सभी लोगों को बधाई। उन्होंने यह भी कहा कि अति वर्षा के कारण जो नुकसान हुआ है उनमें जो कार्य शेष बचे हैं उन्हें भी युद्ध स्तर पर पूरा किया जाए।
समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री ने अधिकारियों के स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि विभाग की जो भी परियोजनायें वर्तमान में चल रही हैं उनको हर हाल में मार्च 2022 तक पूर्ण किया जाए। परियोजनाओं के क्रियान्वयन के कार्य को तेज गति से विभाग के अधिकारी करें। इसके साथ ही गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। मंत्री ने यह भी स्पष्ट कहा कि कोई भी अधिकारी ऐसा कोई कार्य न करें, जिससे विभाग और शासन की छवि खराब हो।
जल संसाधन मंत्री ने समीक्षा बैठक के दौरान कहा है कि जल संसाधन विभाग के तालाब एवं नहरों पर किसी प्रकार का अतिक्रमण नहीं होना चाहिए। ग्वालियर-चंबल संभाग के प्रत्येक जिले में 2 – 2 तालाबों के सौंदर्यीकरण और गहरीकरण का कार्य भी किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को यह भी कहा है कि वे अपने-अपने जिले में जल संसाधन विभाग के माध्यम से किसानों को दी जा रही सुविधाओं के संबंध में किसानों से संवाद करें। संवाद के दौरान किसानों को जो दिक्कतें हैं, उन्हें दूर करने का प्रयास भी किया जाए।
बैठक में मुख्य अभियंता यमुना कछार आरपी झा ने बताया कि अतिवृष्टि के दौरान चंबल दाईं मुख्य नहर 80 जगहों पर क्षतिग्रस्त हुई थी। जिसकी मरम्मत पर लगभग 62 करोड़ 61 लाख रूपए का व्यय होगा। उक्त कार्य की निविदायें आमंत्रित की जाकर कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। इसी प्रकार शिवपुरी जिले के अंतर्गत महुअर नहर प्रणाली, बगोरा नहर प्रणाली एवं अन्य 96 क्षतिग्रस्त नहरों की मरम्म्त का कार्य प्रगति पर है। हरसी मुख्य नहर एवं उनकी शाखायें जो क्षतिग्रस्त हुई थी, उसका कार्य भी प्रगति पर है।
बैठक में जल संसाधन विभाग की प्रमुख परियोजनाओं के संबंध में विस्तार से समीक्षा की गई। जिन योजनाओं की समीक्षा की गई उनमें मूंझरी वृहद परियोजना, लोअर आपदा बांध, पातालगढ़ वृहद योजना, चेंटीखेड़ा योजना, टर्राकलां डायवर्सन योजना के साथ ही सुपावली माइक्रो उद्हन योजना, धनेला उद्हन, परीक्षा उद्हन, पड़ावली उद्हन योजना शामिल है।
चंबल माइक्रो सिंचाई परियोजना
बैठक में चंबल माइक्रो सिंचाई परियोजना श्योपुर के संबंध में भी जानकारी दी गई। इस योजना की लागत 153 करोड़ 57 लाख रूपए है। परियोजना के अंतर्गत चंबल दाईं मुख्य नहर से चार पम्पों द्वारा पानी लिफ्ट कर ओवर टैंक में पहुँचाया जायेगा। जिसके बाद ग्रेविटी पाइपलाइन नेटवर्क द्वारा स्प्रिंकलर पद्धति से सिंचाई की जायेगी। इस परियोजना से श्योपुर जिले के 52 गाँवों की 12 हजार हैक्टेयर भूमि में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इस परियोजना से लगभग 10 हजार किसान लाभान्वित होंगे। परियोजना का लगभग 85 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो गया है।
बहुउद्देश्यीय श्रीमंत माधवराव सिंधिया परियोजना
समीक्षा बैठक के दौरान श्रीमंत माधवराव सिंधिया बहुउद्देश्यीय परियोजना की भी विस्तार से समीक्षा की गई। शिवपुरी जिले की कूनों नदी पर प्रस्तावित उक्त वृहद परियोजना से शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, ग्वालियर एवं भिण्ड जिले की एक लाख 50 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के साथ-साथ ग्वालियर शहर की पेयजल व्यवस्था हेतु भी पानी उपलब्ध होगा। इसके साथ ही चंबल एक्सप्रेस-वे के निर्माण उपरांत डेवलपमेंट होने वाला कमाण्ड क्षेत्र शामिल है। परियोजना में पाँच मेगावाट विद्युत उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। उक्त परियोजना की अनुमानित लागत 5500 करोड़ रूपए आंकलित है।

