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सड़क घोटाला-ठेकेदार को सबसे अधिक भुगतान करने वाले ग्वालियर के अधिकारी, रिटायर्ड EE और SDO भी शामिल

फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
ग्वालियर. चंबल-ग्वालियर सहित अंचल के 4 जिलों में सड़क मरम्मत की आड़ में फर्जी बिलों के भुगतान के मामले में जांच का दायरा अब लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के उन अधिकारियों तक जा पहुंचा है। जिन्होंने दतिया, भिण्ड, मुरैना और ग्वालियर में पदस्थ रहते हुए दिल्ली की ठेकेदार फर्म ट्रांममेटेलाइट इंडिया लिमिटेड के बिलों को पास करते हुए 6 करोड 31 लाख रूपये से ज्यादा का पेमेंट कर दिया। दस्तावेज परीक्षण के बाद उन अधिकारियों से भी जवाब तलब किया जायेगा।
मुख्यमंत्री मॉनिटरिंग सूची में इस मामले के शामिल होने के बाद जांच के बिन्दु भोपाल मुख्यालय से तय किये जा रहे है। सूत्रों के मुताबिक 2023 से इन मनमाने पेमेंटों का सिलसिला शुरू हुआ और अब भी कम्पनी के ऐसे ही बिलों की फाइलें आगे बढ़ती जा रही है। इस कम्पनी के साथ पीडब्ल्यूडी के अनुबंध की अवधि 6 अक्टूबर 2026़ तक की है। गौरतलब है कि विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता एसएल सूर्यवंशी ने जांच में पाया कि कम्पनी ने 210 किमी की सड़कों पर तय अनुबंध के अनुसार काम ही नहीं किया और फिर भी विभाग के अधिकारियों ने कम्पनी के बिलों का भुगतान कर दिया। सूर्यवंशी ने ग्वालियर, भिंड, दतिया व मुरैना के कार्यपालन यंत्रियों को पत्र भेजकर इस काम की गलत सत्यापन रिपोर्ट लगाने और भुगतान करने वालों के खिलाफ कार्यवाही प्रस्तावित करने के निर्देश दिए थे। लेकिन सभी कार्यपालन यंत्री द्वारा इस मामले में कोई कदम नहीं उठाया गया।
चारों जिलों में सबसे ज्यादा भुगतान ग्वालियर से हुआ
अंचल के 4 जिलों में ट्रांसमेटेलाइट इंडिया लिमिटेड को सबसे ज्यादा बिल भुगतान ग्वालियर पीडब्ल्यूडी अफसरों ने किया है। विभागीय स्तर पर की जा रही जांच में दो-तीन दिन में ये स्पष्ट हो जाएगा कि ग्वालियर, भिंड, मुरैना व दतिया में कितना-कितना भुगतान हुआ है। सूत्रों के अनुसार ग्वालियर में जिन कार्यपालन यंत्रियों ने भुगतान किया है उनमें से एक रिटायर्ड हो चुके हैं और 2 प्रभारी कार्यपालन यंत्री रहे अधिकारी अन्य स्थानों पर कार्यरत हैं। ऐसे ही एक अन्य रिटायर्ड कार्यपालन यंत्री ने मुरैना में भुगतान किया हुआ है। वहीं ग्वालियर में एक रिटायर्ड एसडीओ व तकनीकी शाखा में अभी पदस्थ एक अनुरेखक की भूमिका जांच के घेरे में बनी हुई है।

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