रॉफेल एफ-3 ने कहर बरपाया ऑपरेशन सिंदूर में , अब आयेगा रॉफेल का आयेगा एडवांस वर्जन

नई दिल्ली. भारतीय वायुसेना (आईएएफ) की ताकत बढ़ाने के लिये राफेल फायटर जेट्स की खरीद पर बड़ा अपडेट आया है। फ्रांस के रक्षा मंत्रालय से लीक हुई जानकारी के मुताबिक भारत 90 राफेल एफ-4 मल्टीरोल जेट्स खरीदने की प्लान कर रहे हैं। 24 नेक्स्ट जनरेशन राफेल एफ-5 वेरिएंट का ऑप्शन भी, यूरेशियन टाइम्स के मुताबिक इसके अलावा 114 राफेल की खरीद का प्रस्ताव भी आगे बढ़ रहा है।

क्यों राफेल जरूरी है
भारतीय वायुसेना के पास अभी सिर्फ 29 फायटर स्क्वाड्रन है। जबकि जरूरत 42.5 की है। स्वदेशी प्रोग्राम में देरी से यह गैप बढ़ गया है। पाकिस्तान को अमेरिका से एफ-16 अपग्रेड मिल रहा है। जो 2040 तक चलेगा। पाकिस्तान के पास जे-10सी और पीएल-15 मिसाइलें है। वह जे-35 फिफ्थ जनरेशन जेट लेने की कोशिश में है। चीन के पास 400 जे-20 जेट है। ऐसे में भारत को जल्दी मजबूत फायटर फ्लीट चाहिये। राफेल चुनने से एक ही तरह का फ्लीट रहेगा। मेंटेनेंस आसान होगा। जी-2जी डील से जल्दी साइन हो सकता है। ऑपरेशन सिंदूर में राफेल की ताकत साबित हो चुकी है।
राफेल के क्या है वेरिएंट
एफ-3आर भारत के पास पहले से 36 राफेल एफ3आर है।(2016 डील) यह मीटियोर मिसाइल, एमआईसीए, हैमर बॉम्ब, स्पेक्ट्रा ईडब्ल्यू सिस्टम से लैस, भारत स्पेसिफिक बदलाव जैसे अस्त्र मिसाइल हेलमेट डिस्प्ले।
एफ-4 नया स्टैंडर्ड, सेंसर, नेटवर्क, बेहतर रडार, स्टेल्थ टारगेट डिटेक्ट कर सकता है 2029 से डिलेवरीह।
एफ-5 (सुपर राफेल) 2030 तक तैयार, ज्यादा थ्रस्ट इंजन, हाइपरसोनिक मिसाइल, ड्रोन विंगमैन, बेहतर ईडब्ल्यू सिस्टम, फिफ्थ और सिक्स्थ जनरेशन के बीच ब्रिज।
कैसे संभव होगा मेक-इन-इंडिया
फ्रेंच ऑफिशियल्स कहते हैं कि मेक-इन-इंडिया तभी फायदेमंद अगर पूरा 114 (आईएएफ)$26 नेवी ऑर्डर हो। इससे असेंम्बली लाइन लग सकेगी। डिसॉल्ट पहले से भारत में फ्यूजलेज बना रहा है। सेफ्रॉन हैदराबाद में एम88 इंजन का एमआरओ प्लांट लगा रहा है। सेफ्रॉन और डीआरडीओ मिलकर एएमसीए के लिये नया जेट इंजन बना रहे हैं। 100 प्रतिशत टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के साथ।
जियोपॉलिटिकल मैसेज
अमेरिका पाकिस्तान को हथियार दे रहा है, चीन से ट्रेड बढ़ा रहा है. भारत फ्रांस के साथ करीब आ रहा है. फ्रांस कभी सैंक्शन नहीं लगाता. भारत रूस से Su-57 पर भी बात कर रहा है. बैलेंस बनाए रखने की कोशिश हो रही है.
आगे क्या?
प्रस्ताव को AoN और CCS अप्रूवल चाहिए. 2026 में मैक्रों भारत आएंगे, शायद डील लॉन्च हो. अगर डील हुई तो भारत फ्रांस के बाहर सबसे बड़ा राफेल ऑपरेटर बनेगा (175+ जेट्स). प्रोडक्शन रेट बढ़ रहा है, भारत में बनाने से सस्ता पड़ेगा. राफेल लाइफ-साइकल कॉस्ट कम है, रशियन जेट्स से बेहतर.

