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रिसर्च: शोध छात्रों ने प्राध्यापक के मार्गदर्शन में तैयार की गणितीय मॉडलिंग

गणितीय मॉडलिंग से पर्यावरण एवं संक्रामक रोगों के भविष्य में होने वाले प्रभाव का पता किया जा सकेगा
ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय के गणित विभाग के शोध छात्रों ने प्रोफेसर ओपी मिश्रा के मार्गदर्शन में गणितीय मॉडलिंग की है जिससे पर्यावरण एवं संक्रामक रोगों के भविष्य में होने वाले प्रभाव का पता किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में पर्यावरण का असर मानव गतिविधियों के कारण (औद्योगिकीकरण,वन कटाई, वायु प्रदूषण,जल प्रदूषण) विभिन्न प्राणियों पर वर्तमान परिप्रेक्ष्य को देखते हुए भविष्य में क्या प्रभाव पड़ेगा कौन सा प्राणी रहेगा कौन सा समाप्त हो जाएगा। इससे संक्रामक बीमारी कैसे जनसंख्या में फैलेगी इसे कैसे नियंत्रण कर सकते हैं इसके बारे में पता चलेगा। वैक्सीनेशन, टेस्टिंग कितने लोगों पर होनी चाहिए कम लागत पर कैसे किया जा सकता है।
यह संक्रामक बीमारी कितनी तेजी से जनसंख्या में फैलेगी। रिप्रोडक्शन नंबर की गणना रोग संबंधी पैरामीटर के द्वारा की जाती है।जल संबंधी प्रदूषण से होने वाली बीमारी कॉलरा, मलेरिया के फैलने के बारे में भी पता लगा सकते हैं। फ्लू, कोरोना जैसे संक्रमित रोगों को फैलने से रोकने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। रिप्रोडक्शन नंबर को नियंत्रित करते हैं जिससे संक्रमण न फैले । रिप्रोडक्शन नंबर 01 से कम है तो संक्रमण धीरे धीरे खत्म हो जाएगा यदि 01 से ज्यादा है तो संक्रमण फैलेगा । इसलिए रिप्रोडक्शन नंबर को नियंत्रित करने के लिए मैथमेटिकल नंबर का उपयोग किया जाता है। इनसे संबंधित कौन कौन से नियंत्रित करने के उपाय है जिनसे हमारा इको सिस्टम संरक्षित रह सके और संक्रामक रोगों को फैलने से रोका जा सके। चूंकि एक्सपेरिमेंटल महंगा है तो इसे मैथमेटिकल मॉडलिंग से कम लागत पर किया जा सकता है। पर्यावरण, पारिस्थितिकी की भविष्य में होने वाली समस्याओं से अवगत करा सकते हैं और भविष्य में होने वाली बीमारियों से अवगत करा सकते हैं। इसी के साथ मैथमेटिकल मॉडलिंग का उपयोग संक्रामक रोगों की समस्या को कम करने तथा रोकने में भी मॉडल का उपयोग कर सकते हैं।
पर्यावरण का प्रभाव संक्रामक रोगों तथा पारिस्थितिकी दोनों पर पड़ता है प्लांट संबंधी बीमारियों के ऊपर भी मॉडलिंग की जा रही है प्लांट पर निर्भर प्राणियों पर डिसीज का क्या प्रभाव पड़ेगा इसकी स्टडी भी मॉडलिंग के द्वारा की जा रही है। चूंकि एक्सपेरिमेंटल करना काफी महंगा होता है इसलिए मैथमेटिकल मॉडलिंग से कम लागत पर किया जा सकता है।
शोध छात्र -दिव्या चतुर्वेदी, शिवमंगल नामदेव, ओमप्रकाश सिसौदिया, अरविंद सिंह, जाहिद युसुफ
गणित विभाग में मैथमेटिकल मॉडलिंग का प्रयोग सारे विषयों से संबंधित समस्याओं का समाधान निकालने संख्यात्मक एवं गुणात्मक विश्लेषण के लिए किया जाता है। मैथमेटिकल मॉडलिंग में शोध गणित विभाग तत्संबंधी अध्ययनशाला जीवाजी विश्वविद्यालय में किया जाता है जो कि देश के अग्रणी संस्थान आईआईटी कानपुर, आईआईटी दिल्ली में ही होता है। मैथमेटिकल मॉडलिंग का प्रयोग पर्यावरण एवं संक्रामक बीमारियों से संबंधित समस्याओं का समाधान करने के लिए किया जाता है।
प्रो.ओपी मिश्रा,गणित विभाग जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर

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