मप्र की सियासत की दिशा भी बदलने वाली है, पीएम मोदी का दौरा आदिवासी केंद्रित कर जाएगा मप्र की सियासत
भोपाल. कई राज्यों में सत्ता का फैसला करते आदिवासी समुदाय को लेकर भाजपा की सक्रियता मध्य प्रदेश की सियासत की दिशा भी बदलने वाली है। 15 नवंबर को राजधानी में आयोजित जनजातीय गौरव दिवस के मुख्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संबोधन इस लिहाज से बेहद खास होने वाला है। आदिवासी समुदाय के प्रति उनकी भावनाओं, कल्याणकारी योजनाओं और उन्हें सियासत में हिस्सेदारी पर प्रधानमंत्री जो दिशा तय करेंगे, वही 2023 के विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा की रणनीति होगी। ऐसे में कांग्रेस खेमा भी रणनीति में बदलाव करते हुए आदिवासी समुदायों को जोड़ने की कवायद तेज करेगा। हालांकि दोनों दल आदिवासी चेहरों की कमी से जूझ रहे हैं, तो इस समुदाय को रिझाने से सियासत में बड़े बदलाव की शुरुआत होना तय माना जा रहा है।
वर्ष 2018 के चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद भाजपा ने आदिवासी सीटों में आई कमी को गंभीरता से लिया। इस बीच करीब डेढ़ साल बाद शिवराज सिंह चौहान ने चौथी बार प्रदेश की बागडोर संभाली, तो गरीब, किसान, महिला, युवाओं के लिए कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वन का पैमाना आदिवासी गांवों व बस्तियों की बदलती सूरत को तय कर दिया। नहरों के बाद पाइप से खेतों तक पानी पहुंचाने की योजना में आदिवासी किसानों को तरजीह दी जाने लगी।

