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मकान तोड़ने गए असिस्टेंट कमिश्नर से वकीलों की झड़प, अफसर को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा

जबलपुर. नगर निगम के सहायक आयुक्त वेदप्रकाश चौधरी को कुछ वकीलों और उनके समर्थकों ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा, विवाद जर्जर मकान को तोड़ने को लेकर शुरू हुआ था। दोनों पक्षों की ओर से ओमती थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। नगर निगम की ओर से बताया गया कि मढ़ाताल गुरूवार के पास सुशीला शुक्ला का मकान जर्जर हो चुका है। मकान में 7 किराएदार है। जर्जर मकान तोड़ने के लिए नगर निगम से नोटिस जारी हुआ था। नोटिस पर कोर्ट से स्टे ले लिया गया था। इस स्टे को जर्जर मकान की फोटोग्राफ और भवन अधिकारी की रिपोर्ट के साथ कोर्ट में पेश किया गया, 22 सितंबर को कोर्ट ने स्टे हटा दिया।

मकान तोड़ने का विरोध किया
दोपहर बाद नगर निगम का अमला जर्जर मकान तोड़ने पहुंचा, सहायक आयुक्त वेदप्रकाश चौधरी के अनुसार इसकी सूचना एसडीएम, एसपी और ओमती थाने को दी गई थी। पुलिस के पहुंचने से पहले ही वह अमले के साथ मकान तोड़ने पहुंच गए। इसी मकान में पेशे से वकील शार्दुल ठाकुर भी रहते है, उन्होंने और उनके सार्थियों ने मकान तोड़ने का विरोध किया। इसे लेकर उनके बीच कहा सुनी हो गई। अधिवक्ता का तर्क था कि मकान का कुछ ही हिस्सा जर्जर था, शेष मरम्मत करा लिया गया है लेकिन नगर निगम का अमला सुनने को तैयार नहीं था।

शार्दुल ठाकुर के बुलावे पर पहुंचे वकील
शार्दुल ठाकुर के मुताबिक नगर निगम के सहायक आयुक्त और उनके अमले ने उनके साथ बेल्ट से मारपीट की। इस सूचना पर 10-15 की संख्या में और अधिवक्ता सचिन गुप्ता के साथ पहुंच गए। सहायक आयुक्त का आरोप है कि कुछ बाहरी लोगों को भी बुला लिया था। सभी लोगों ने मिलकर सहायक आयुक्त वेदप्रकाश चौधरी पर हमला बोल दिया। नगर निगम अधिकारी ने बचने के लिए दौड़ लगा दी। नगर निगम के कर्मचारियों ने सहायक आयुक्त को बचाया। विवाद की सूचना पर कांग्रेस विधायक विनय सक्सेना भी पहुंच गए थे।

जर्जर मकान तोड़ने के पीछे कब्जे का खेल
अधिवक्ता सचिन गुप्ता ने आरोप लगाया कि जर्जर मकान बता इसे तोड़ने के पीछे कब्जे का खेल है। कुछ लोग इस मकान पर कब्जा करना चाहते हैं। यहां रह रहे किराएदारों ने अपने हिस्से के एवज में पैसे दे चुके हैं, लेकिन नगर निगम के अधिकारी कुछ सुनने को तैयार नहीं। सहायक आयुक्त वेदप्रकाश चौधरी का दावा है कि कोर्ट ने जर्जर मकान न तोड़ने पर फटकार लगाई थी। कोर्ट के आदेश के क्रम में ही वह मकान तोड़ने पहुंचे थे। उन्होंने तो वहां रह रहे किराएदारों से बात भी की थी कि कोई स्टे आदि हो तो पेश कर दें।

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