प्रायवेट स्कूल संचालक एसोशियेशन ने 8 सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा
ग्वालियर. प्रायवेट स्कूल एसोसियेशन के आव्हान पर प्रायवेट स्कूल के संचालकों ने फूलबाग चौराहा से एकत्रित होकर संभागायुक्त को मुख्यमंत्री के नाम पर 8 सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा हैं। इसमें प्रायवेट संचालकों ने मांग की है। कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को लेकर स्कूल बंद का निर्णय वापिस लिये जाने की मांग की है। देश के अन्य राज्यों की तरह हमारे विद्यालय खुले रहें। जिससे गरीब छात्र अध्ययन कर सकें।
कोरोना महामारी के कारण स्कूल बंद हैं ऐसी स्थिति में शिक्षा विभाग द्वारा हाईस्कूल एवं हायर सेकेण्डरी मान्यता नवीनीकरण के लिये निरीक्षण परीक्षण कराया जा रहा है। निरीक्षण कार्य एवं अधिकारियों द्वारा स्कूल संचालकों को निरीक्षण के नाम पर परेशान करना उचित नहीं हैं। जिस तरह से 12वीं कक्षा तक की मान्यता नवीनीकरण, जैसे सीबीआई ने किया हैं। बिना परीक्षण परीक्षण के जारी किया जावें और साथ ही मान्यता एवं संबंधित का शुल्क माफ किया जायें।
प्रायवेट स्कूल एसोसियेशन के अध्यक्ष कौंशलेन्द्र चौहान ने मांग की है छात्रवृति जांच के विषय में अभी भी संचालकों को परेशान किया जा रहा है जबकि पूर्व में 21 जून को लिखे गये पत्र के माध्यम से अवगत करा दिया गया था। जानकारी के नाम पर स्कूल संचालकों को परेशान नहीं किया जाये।
स्कूल की चाबी लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे स्कूल संचालक
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यह है मांगें
कोविड – 19 के नियमों का पालन करते हुए सरकार नर्सरी से कक्षा 5वीं तक के स्कूल 2 दिन खोले और कक्षा 6वीं से 8वीं तक आल्टरनेट डे पर स्कूल खोले। कक्षा नवमी से कक्षा 12वीं तक नियमित कक्षा संचालन के निर्देश जारी करे।
आरटीई फीस प्रतिपूर्ति की राशि वर्ष 2016-2017 से वर्ष 2020-2021 तक जल्द संस्था के खाते में जमा की जाए।
कक्षा पहली से 8वीं तक जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा और कक्षा नवमी से 12वीं तक लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा बिना निरीक्षण परीक्षण के नवीनीकरण मान्यताएं 5 साल के लिए शीघ्र जारी की जाए।
लॉकडाउन में बंद पड़े स्कूलों से लिए जाने वाले बिजली बिल, संपत्ति टैक्स, कचरा प्रबंधन शुल्क को पूरी तरह से 2 साल के लिए माफ किया जाए।
विद्यालय संचालन के लिए संचालकों के द्वारा लिए गए बैंक लोन के किश्त की राशि विद्यालय खुलने तक नहीं लिए जाने के लिए सरकार बैंकों को निर्देश जारी करे।
विद्यालयों को आर्थिक पैकेज के तहत आर्थिक सहायता प्रदान करे।
स्कूल इंस्टीटयूशन एक्ट के तहत स्टॉफ से अभद्र व्यवहार करने वाले पालकों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही हो।

