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पुजारी के नियुक्ति विवाद पर आया हाईकोर्ट का फैसला, डबल बेंच ने रिट अपील की खारिज

ग्वालियर. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच की डबल बेंच ने पुजारी की नियुक्ति से जुड़े विवाद में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। हाईकोर्ट ने मुरली मनोहर देबौलिया द्वारा दायर रिट अपील को खारिज करते हुए यह स्पष्ट किया है कि पुजारी का पद न तो सिविल पोस्ट है और न ही इस पर किसी प्रकार के वैधानिक नियम लागू होते हैं। हालांकि हाईकोर्ट ने अपीलकर्ता को सिविल कोर्ट में जाकर अपने अधिकार स्थापित करने की स्वतंत्रता दी है।
निरस्तीकरण और नियुक्ति का मामला
यह मामला याचिकाकर्ता मुरली मनोहर देबौलिया की नियुक्ति से संबंधित है, उन्हें 16 फरवरी 2023 को दतिया के एसडीओ द्वारा पुजारी नियुक्त किया गया था। इसके बाद ग्राम पंचायत की अनुशंसा पर 10 अप्रैल 2023 को यह नियुक्ति निरस्त कर दी गयी । याचिकाकर्ता का कहना था कि ग्राम पंचायत को ऐसी अनुशंसा करने का कोई हक नहीं है और बिना सुनवाई के नियुक्ति रद्द करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
मंदिर की प्रकृति बना विवाद का केन्द्र
युगल पीठ ने माना है कि विवाद का मूल प्रश्न यह है कि संबंधित मंदिर ‘‘माफी औकाफ मंदिर’’ है या निजी मंदिर। राज्य सरकार की तरफ से दलील दी गयी है। मंदिर सरकारी भूमि पर स्थित है। लेकिन वह माफी मंदिर नहीं है। वहीं अपीलकर्ता ने मंदिर को माफी औकाफ का मंदिर बताया है। हाईकोर्ट ने कहा हैकि यह एक अत्यंत विवादित तथ्यात्मक प्रश्न है। जिसका निर्णय केवल साक्ष्यों के आधार पर ही किया जा सकता है। फिलहाल सरकारी अभिलेखों में मंदिर को माफी मंदिर के रूप में दर्ज नहीं पाया गया है।

 

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