दिल्ली में बाइक टैक्सी बैन, 1 लाख बेरोजगार
नई दिल्ली. दिल्ली सरकार ने 20 फरवरी को एक आदेश जारी किया, जिसमें लिखा था कि निजी बाइक का कॉमर्शियल यूज नहीं किया जा सकेगा, अगर कोई ऐसा करते पाया गया तो 1 लाख रुपए तक का जुर्माना लगेगा। इस आदेश से दिल्ली में बाइक टैक्सी चलाने वाले 80 हजार से 1 लाख लोगों की हालत सुनील जैसी हो गई। वे कहते हैं कि खाने तक का पैसा नहीं है। बच्चे भूखे रोते हैं, ऐसे में कुछ सही गलत नहीं दिखता। ये सर्विस इस्तेमाल करने वाले लोग भी परेशान हैं। इसकी दो वजहें है- पहली बाइक टैक्सी ऑटो या कैब के मुकाबले बहुत सस्ती होती है। इनका किराया कैब से एक चौथाई और ऑटो से लगभग आधा होता था। दूसरी कि दिल्ली के जाम में ये कम समय में मंजिल तक पहुंचा देती थीं।
बिना इन्वेस्टमेंट वाला काम था, कमाई भी अच्छी
कोरोना के दौरान जिनका काम छिन गया, घर में खड़ी बाइक उनके लिए रोजगार हो गई। बहुत से लोग जो कुछ और नहीं कर पा रहे थे और जिनके पास बाइक थी, उन्होंने बाइक राइड सर्विस देने वाले ऐप पर आईडी बनाई और ये काम शुरू कर दिया। इसमें कोई खर्च भी नहीं आया और रोज 5 सौ रुपए तक कमाई हो जाती।
कुछ दिन में खाने के लाले हो जाएंगे
ये सर्विस बंद होने के बाद मैंने उन लोगों से बात की, जो बाइक टैक्सी से अपना परिवार चला रहे थे। सबसे पहले मुझे 53 साल के वेद प्रकाश मिले। वे तीन साल से बाइक टैक्सी चला रहे थे। वेद प्रकाश कहते हैं, परिवार में 5 लोग हैं। उनका खर्च कैसे उठाऊं। पहले रोज 700-800 रुपए कमा लेता था। इतने में घर चलाना मुश्किल था, लेकिन फिर भी चल तो रहा था। बाइक टैक्सी बंद हुई तो, सब रुक गया। अब इस उम्र में और क्या काम करूंगा। 10वीं तक पढ़ा हूं। तीन बच्चे हैं, जो पढ़ाई कर रहे हैं। अगर मैं कोई काम नहीं कर पाया, तो उनकी पढ़ाई रुक जाएगी।

