धूमेश्वर में बहे दोनों छात्रों के शव मिले, एक दूसरे को बचाते हुए दुनिया को अलबिदा कहा

ग्वालियर. 2 इंजीनियरिंग छात्र रविवार की दोपहर भितरवार धूमेश्वरधाम पर सिंध नदी में नहाते समय बह गये थे। दोनों एक दूसरे को बचाते हुए गहरे पानी में समा गये थे। दोनों दोस्तों कंे शव सोमवार की दोपहर में रेस्क्यू टीम को मिल गये थे। एक छात्र का शव सोमवार की दोपहर 12 बजे जबकि दूसरे का शव सोमवार की शाम 6 बजे रेस्क्यू टीम को घटनास्थल से लगभग आधा किलोमीटर मिल गये हैं। अभी वर्षा के चलते बार-बार नदी में पानी बढ़ने से वहां रेस्क्यू टीम को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा है। मृतक दोनों गहरे दोस्त थे। बचपन में स्कूल से साथ रहे और साथ में इंजीनियरिंग करने की सोची। एक का पूणे कॉलेज में प्रवेश मिला तो दूसरा ग्वालियर से ही पढ़ाई कर रहा था, पर कोविड़ ने एक बार फिर से उन्हें मिला दिया था। दोनों जैसे साथ जिये थे वैसे ही एक दूसरे को बचाते-बचाते दुनिया को अलबिदा कह गये।

यह है पूरी घटना
ग्वालियर के दाल बाजार, नई सड़क से व्यापारियों का एक दल रविवार की दोपहर पिकनिक मनाने के लिए धूमेश्वर धाम मंदिर पहुंचे थे। इस दल में नई सड़क निवासी किशन होतवानी और कितांशु शाक्य निवासी कंपू भी शामिल थे। यह दोनों बचपन के दोस्त हैं और BE फाइनल ईयर के छात्र हैं। धूमेश्वर मंदिर पहुंचने के बाद दर्शन करने से पहले सभी नहाने के लिए नदी में उतरे थे, लेकिन उसी समय किशन होतवानी अचानक गहरे पानी और बहाव में चला गया। उसे तैरना भी नहीं आता था। जैसे ही वह बहने लगा तो उसे बचाने के लिए उसका दोस्त कितांशु शाक्य भी गहरे पानी में कूद गया। इसके बाद दोनों एक दूसरे का हाथ पकड़े हुए पानी के बहाव में बहते चले गए। लोगों ने कुछ दूरी तक उनको बहते देखा फिर वह नदी के बहाव में कहीं गुम हो गए थे। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। ग्वालियर से NDRF की टीम भी मौके पर पहुंची और बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन इस बचाव कार्य में काफी देर हो चुकी थी। दोनों बच्चों के डूबने का पता चलते ही परिजन भी वहां पहुंच गए थे।
22 घंटे के बाद मिले पहला शव
घटना के लगभग 22 घंटे के बाद सोमवार की दोपहर 12 बजे किशन होतवानी का शव डूबने वाले स्थान से लगभग 200 मीटर दूसर में पत्थरों में उलझा मिला और इसके बाद कितांशु की तलाश जारी रहीं, पर वह कहीं नहीं मिल रहा था। किशन को बचाने वह पानी में कूद गया था। काफी तलाश किया जा रहा था, कितांशु का शव किशन के शव मिलने के 6 घंटे के बाद लगभग आधा किमी दूर मिला। दोनों शवों को पुलिस ने निगरानी में लेकर पोस्टमार्टम हाउस भेजा है।
दोस्ती जिन्दा रहें मौत के बाद भी
लोगों का कहना था कि दोनों बचपन से स्कूल में साथ पढ़े और दोनों में गहरी दोस्ती थी और इसके बाद भी बड़े हुए तो इंजीनियरिंग का फैसला भी साथ लिया। कितांशु पूणे महाराष्ट्र से इंजीनियरिंग कर रहा था। किशन ग्वालियर के एक कॉलेज से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था। वैसे तो अक्सर मुलाकात होती थी। लेकिन एक साल से कोविड़ के चलते कितांशु ग्वालियर में ही था। इस कारण दिन भर साथ रहते थे। दोनों की मौत हो गयी लेकिन जैसे एक दूसरे को बचाते हुए उन्होंने दम तोड़ा उससे दोस्ती को हमेशा के लिये जिन्दा कर गये।

