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तीन दिवसीय शैक्षिणिक भ्रमण के लिए छात्र/छात्राओं का दल हुआ रवाना

खजुराहो, मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित, भारत का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थल है। इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है। खजुराहो अपनी अद्भुत मूर्तिकला, स्थापत्य कला और प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। यहां के शैक्षणिक भ्रमण न केवल ऐतिहासिक ज्ञान प्रदान करती है, बल्कि कला, संस्कृति और वास्तुकला का गहन अध्ययन भी संभव बनाती है।
आज शैक्षणिक भ्रमण के लिए सुबह विश्वविद्यालय परिसर निकले, खजुराहो पहुँचने के बाद, छात्रों ने सर्वप्रथम बीजासेन मंडल, चतुर्भुज मंदिर, और ब्रह्मा मंदिर, वामन मंदिर एवं जावारी मंदिर का अवलोकन किया। प्रो.शान्तिदेव सिसोदिया विभाग प्रमुख प्राचीन भारतीय इतिहास एवं संस्कृति, पुरातत्व अध्ययन शाला और शोधार्थी राजकुमार गोखले, राहुल बरैया,शामिन खान व पुरातत्व अध्ययन शाला के प्रथम एवं तृतीय और संग्रहालय विज्ञान प्रथम सेमेस्टर के छात्र – छात्राओं ने पुरातात्विक दृष्टि से मंदिर स्थापत्य कला को समझा और चंदेल व कच्छप घात कालीन मंदिरों का तुलनात्मक अध्ययन किया और साथ साथ इन मंदिरों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उनकी स्थापत्य विशेषताओं के बारे में विस्तार से विषय विशेषज्ञों द्वारा बताया गया|
इस शैक्षणिक भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, इतिहास और वास्तुकला की महानता से परिचित कराना था। खजुराहो के मंदिर 10वीं और 12वीं शताब्दी के बीच चंदेल वंश के राजाओं द्वारा बनाए गए थे। इन मंदिरों की दीवारों पर उकेरी गई मूर्तियां भारतीय कला की उत्कृष्टता को दर्शाती हैं।

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