जेयू और निगम में छिड़ी टैक्स की लड़ाई, आज भी हंगामा
ग्वालियर. जीवाजी विश्वविद्यालय और नगर निगम के बीच बकाया संपत्तिकर व जलकर को लेकर अब जंग छिड़ गई है। नगर निगम का कहना है कि जेयू पर सात करोड़ रुपए का संपत्तिकर और तीन लाख रुपए का जलकर बकाया है। वहीं जेयू का कहना है कि संपत्तिकर का मामला कोर्ट में लंबित है और जलकर जमा करने की अंतिम तारीख 27 मार्च है। ऐसे में निगम की कार्रवाई बिल्कुल गलत है।
वर्तमान में वित्तीय वर्ष 2022-23 की समाप्ति नजदीक
ऐसे में राजस्व वसूली का आंकड़ा बढ़ाने के लिए नगर निगम के अमले ने संपत्तिकर और जलकर वसूली का अभियान शुरू किया है। इसमें बड़े बकाएदारों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। जीवाजी यूनिवर्सिटी पर संपत्तिकर के रूप में सात करोड़ से अधिक की राशि का भुगतान बकाया है। नगर निगम द्वारा मप्र नगर पालिक निगम अधिनियम की धारा 173 एवं 174 के तहत पूर्व में नोटिस दिए गए थे। इसके अतिरिक्त लोक अदालत द्वारा विगत दो वर्षों में सात बार नोटिस देने के उपरांत भी जीवाजी यूनिवर्सिटी द्वारा संपत्तिकर का भुगतान नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा जीवाजी यूनिवर्सिटी पर तीन लाख रुपए का जलकर बकाया भी बताकर निगम ने गत शनिवार को पानी की लाइन का कनेक्शन काट दिया था। इसके चलते छात्रों को परेशानी हुई, तो उन्होंने ईसी मेंबरों को फोन कर इसकी जानकारी दी। रविवार को ईसी मेंबरों ने जब छानबीन की, तो पता चला कि संपत्तिकर का मामला अभी कोर्ट में लंबित है, जबकि तीन लाख के बकाया जलकर को भरने की आखिरी तारीख 27 मार्च है। इसके चलते ईसी मेंबर भी छात्रों के साथ निगम मुख्यालय पहुंचे और धरना प्रदर्शन किया।
उधर मामले की जानकारी कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह को मिली, तो उन्होंने निगम अधिकारियों को इस मामले में बीच का रास्ता निकालने के निर्देश दिए। ऐसे में निगम ने पानी के टैंकर जीवाजी यूनिवर्सिटी भेजे, तो हास्टलों की टंकियां भरी हुई मिलीं। अब इस मामले में ईसी मेंबरों का कहना है कि जिला प्रशासन को सारी हकीकत से अवगत कराकर छात्रों के हित में अंतिम समय तक आंदोलन किया जाएगा, क्योंकि आज जब यूनिवर्सिटी खुलेगी, तो अन्य विभागों में भी पानी की किल्लत पैदा हो जाएगी।

