ग्वालियर में बेबी गार्गी की मौत मामले में दो अस्पतालों पर 10 लाख रुपए का जुर्माना
ग्वालियर. उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग (उपभोक्ता फोरम) इंदौर ने बेबी गार्गी की मौत में डाक्टरों पर दस लाख चालीस हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। डाक्टरों की लापरवाही से बेबी गार्गी की मौत हुई थी। डाक्टरों की मांग पर परिवाद इंदौर स्थानांतरित किया गया। ग्वालियर की वजाए केस की सुनवाई इंदौर में हुई थी। मैस्काट अस्पताल व मेहरा अस्पताल की लापरवाही के चलते बेबी गार्गी की मौत हुई। बेबी गार्गी की मौत के मामले को लेकर पिता मनोज उपाध्याय ने लड़ाई लड़ी। मेहरा बाल चिकित्सालय अनुपम नगर एवं मैस्कॉट हॉस्पिटल सिंधी कॉलोनी कंपू ग्वालियर पर 5-5 लाख रुपए कुल 10 लाख रुपए परिवादी को देने का आदेश दिए हैं।
परिवादी मनोज उपाध्याय एडवोकेट की 3 वर्षीय बेटी कुमारी गार्गी को दिनांक 25 जनवरी 2013 को मेहरा बाल चिकित्सालय अनुपम नगर में डॉक्टर डीडी शर्मा द्वारा रेफर किया गया था। गार्गी को निमोनिया की शिकायत थी। मेहरा बाल चिकित्सालय में डाक्टर आरके मेहरा अस्पताल के संचालक थे एवं डा अंशुल मेहरा बच्चों के डॉक्टर की हैसियत से कार्य करते थे। डॉ अंशुल मेहरा स्वयं को एमडी पीडियाट्रिशियन यूएसए की एमडी डिग्री होना बताते हुए ग्वालियर में मरीजों के साथ धोखाधड़ी करते थे। बेबी गार्गी का इलाज भी एमडी पीडियाट्रिशियन यूएसए बताते हुए किया था। बेबी गार्गी को निमोनिया होते हुए भी मेहरा हॉस्पिटल में 1 घंटे के भीतर 500 एमएल नॉरमल सलाइन की बोतल चढ़ा दी थी और स्वास्थ्य बिगड़ने पर भी आईवी फ्लूड दिया जाता रहा। इससे बेबी गार्गी के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ा। तब डॉ अंशुल मेहरा ने भर्ती के 3 घंटे बाद वेंटिलेटर की आवश्यकता बताते हुए मैस्कॉट हॉस्पिटल रेफर कर दिया था। मैस्कॉट हॉस्पिटल सिंधी कॉलोनी कंपू ग्वालियर के मालिक आलोक अग्रवाल थे एवं अस्पताल अधीक्षक के रूप में डॉक्टर सीमा शिवहरे व पीडियाट्रिशियन के रूप में डॉक्टर मनोज बंसल कार्य करते थे। मैस्कॉट हॉस्पिटल में बेबी गार्गी को पीआईसीयू में भर्ती किया गया था मैस्कॉट हॉस्पिटल के आईसीयू में बीएचएमएस के फेल छात्र ड्यूटी डॉक्टर के रूप में कार्य कर रहे थे । शैलेंद्र साहू एवं अवधेश दिवाकर को ड्यूटी डॉक्टर के रूप में सेवाएं ली गई थी। जबकि उक्त लोग होम्योपैथी कॉलेज में पढ़ रहे थे। शैलेंद्र साहू 3 वर्ष से लगातार होम्योपैथी में फेल हो रहा था और मैंस्कॉट हॉस्पिटल में आईसीयू में ड्यूटी डॉक्टर का कार्य कर रहा था। परिवादी द्वारा मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल में डॉ अंशुल मेहरा की एमडी पीडियाट्रिशियन की डिग्री होने की शिकायत की गई थी तो स्वयं डॉ अंशुल मेहरा ने मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल भोपाल के समक्ष क्षमा मांगी कि वह एमडी पीडियाट्रिशियन नहीं है और भविष्य में उक्त डिग्री नहीं लिखेगा। मेडिकल काउंसिल ने डॉ अंशुल मेहरा को चेतावनी दी थी कि यदि भविष्य में उनके द्वारा अवैध एमडी पीडियाट्रिशियन की डिग्री लिखी गई तो उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। परिवादी ने मेहरा बाल चिकित्सालय से ट्रीटमेंट पेपर की सीट प्राप्त की थी और पुलिस थाना विश्वविद्यालय में उपचार में लापरवाही की शिकायत की थी। डॉक्टर आरके मेहरा द्वारा बेबी गार्गी की दूसरी ट्रीटमेंट शीट बनाकर पुलिस को दे दी थी जिस पर पुलिस थाना विश्वविद्यालय द्वारा डॉ अंशुल मेहरा डॉ आरके गोयल के विरुद्ध धारा 420 ,465, 468 का अपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किया था। अनुसंधान में धारा 304 एवं अन्य धाराओं का इजाफा किया गया।
सीएमएचओ ग्वालियर को परिवादी द्वारा शिकायत की गई थी तो सीएमएचओ कमेटी द्वारा भी अंशुल मेहरा के द्वारा बेबी गार्गी की मृत्यु के पश्चात ट्रीटमेंट पेपर बनाना पाए थे एवं निमोनिया के रोगी को आई वी फ्लूड दिए जाने की लापरवाही पाई थी। मैस्कॉट हॉस्पिटल के विरुद्ध जब परिवादी ने शिकायत की तो पाया गया कि मैस्कॉट हॉस्पिटल कि डॉ सीमा शिवहरे एवं अस्पताल के मालिक आलोक अग्रवाल द्वारा छात्रों से ड्यूटी डॉक्टर का कार्य लिया जाना पाया गया था एवं अपात्र चिकित्सकों से बेबी गार्गी का इलाज कराया जाना सही पाए जाने पर मैस्कॉट हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर सिंधी कॉलोनी कंपू ग्वालियर का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया था। परिवादी मनोज उपाध्याय ने जिला उपभोक्ता फोरम ग्वालियर के समक्ष 20 जनवरी 2015 को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत शिकायत 20 लाख क्षतिपूर्ति हेतु की प्रस्तुत की थी।

