ग्वालियर में नेफीस, पीएसटीएन व फास्टैग बने पुलिस के हथियार, संगीन अपराधों में इन्हीं से मिले सुराग
ग्वालियर. तकनीक की वजह से हाइटेक हुए अपराधी पुलिस के लिए चुनौती बन रहे हैं, लेकिन यही तकनीक पुलिस का हथियार भी बन रही है। लूट, हत्या, अपहरण, चोरी जैसे सनसनीखेज अपराधों में तकनीक की मदद से ही पुलिस को सुराग मिल रहे हैं और अपराधियों तक पुलिस पहुंच रही है। इनमें चार ऐसे हथियार हैं, जिनकी मदद से सबसे ज्यादा अपराधी पकड़े जा रहे हैं। यह हथियार हैं नेफीस, पीएसटीएन और फास्टैग के साथ सीसीटीवी कैमरे। पहले सबसे ज्यादा अपराधी मोबाइल की लोकेशन से पकड़े जाते थे, लेकिन जब अपराधियों को पता लगा कि वह मोबाइल की लोकेशन से पकड़े जाने लगे हैं तो इन अपराधियों ने इससे बचने का तरीका निकाल लिया।
यह लोग या तो फर्जी सिम का इस्तेमाल करने लगे या फिर अपनी लोकेशन बदलकर गुमराह करने लगे, जब अपराधियों ने इसका तोड़ निकाल लिया तो नेफीस, पीएसटीएन और सीसीटीवी कैमरे बड़े मददगार बन गए। विशेष मदद सीसीटीवी कैमरों से मिल रही है। इनकी मदद से पुलिस कड़ी से कड़ी जोड़कर अपराधियों तक पहुंच रही है। पुलिस को मिलने वाली इन सफलताओं से शायद आदतन अपराधी परेशान भी होंगे। हाल ही शहर में हुई वारदातों में सबसे ज्यादा सीसीटीवी फुटेजों को ही खंगाला गया, सफलता भी मिली। सीसीटीवी कैमरे सबसे ज्यादा अपराधों को सुलझाने में मददगार बने हैं। हालांकि पुलिस के सीसीटीवी कैमरों की जगह निजी कैमरों से अपराधियों के चेहरे व नंबर प्लेट स्पष्ट नजर आए, इससे आरोपित पकड़े गए।
1.20 करोड़ रुपये की सबसे बड़ी लूट के मामले में पुलिस सीसीटीवी कैमरे के पुलिस को बड़ा सुराग मिला। फूलबाग पर लगे कैमरे में पुलिस को संदिग्ध आरोपी का सुराग मिला। गोला का मंदिर इलाके में 12 वर्षीय बालिका से अश्लील छेड़छाड़ करने वाला कारोबारी सीसीटीवी कैमरे की मदद से पकड़ा गया।

