गलवान घाटी में 2020 में उपयोग किये गये चीन फिर से खरीद रहा है हथियार
नई दिल्ली. चीन एक ओर सीमा विवाद सुलझाने के लिये बातचीत की टेबल पर बैठा हुआ है तो वहीं दूसरी ओर अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने के लिये खास प्रकार के हथियार खरीद रहा है। चीन जिन हथियारों को खरीद रहा है। वह उसी तरह के हथियार हैं। जिसका उपयोग चीन ने 2020 में गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों के साथ हुई खूनी संघर्ष में किया था।
चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने कोल्ड वेपन्स श्रेणी के इन कंबाइंड मैसेज हथियार खरीदे है। जिनका उपयोग 2020 गलवान घाटी में हुई झड़प् में हुआ था। इस झड़प् में 20 भारतीय जवान शहीद हुए थे। इस खूनी झड़प् के बाद चीन और भारत के बीच सैन्य गतिरोध बढ़ गया था और मामले को सुलझाने के लिये कई दौर की बातचीत हुई थी। कंबाइंड मैसेज दरअसल उस तरह के गैर परंपरागत हथियार है। जिनके ऊपरी सिरे पर नुकीले औजार लगाकर हमला किया जाता है। एक्सपटर््स को आशंका है कि चीन इन हथियारों का उपयोग एलएसी पर भारतीय सैनिकों के खिलाफ कर सकता है।
चीन ने क्या-क्या खरीदा?
चीनी सेना के पर्चेज ऑर्डर के मुताबिक, इन Maces की लंबाई लगभग 1.8 मीटर होती है. इसके तीन भाग होते हैं, जिनमें ऊपरी हिस्सा हथौड़ा जैसा होता है, हथियार के बीच का सिरा रॉड का जबकि आखिरी हिस्सा रॉड ड्रिल की तरह का होता है। इस हथियार के दोनों सिरों पर स्टील के स्पाइक्स और नुकीले कीले लगी है। इस हथियार की रॉड बॉडी जिंक स्टील की बनी होती है। लंबी रोड के सिरों पर नुकीली कीले है। यह काफी खरतरनाक हथियार है। चीन के विदेश मामलों पर पकड़ रखने वाले एक्सपर्ट सुयश देसाई का कहना है कि Maces और Combined Maces की तस्वीरें पीएलए की पर्सेज वेबसाइट पर मौजूद है। चीन की सेना यकीनन भारत-चीन सीमा पर इनका इस्तेमाल करने जा रही है।
उन्होंने कहा कि इन हथियारों का पहले भी सीमा पर इस्तेमाल हो चुका है। इसलिए यह तय है कि सीमा पर दोबारा इनका इस्तेमाल होगा। इन हथियारों की खरीद के लिए जिस तरह से टेंडर निकाले गए है।उससे साफ पता चलता है कि सीमा पर भारत का मुकाबला करने के लिए ये उपयुक्त है। इस तरह के हथियारों की खरीद से पता चलता है कि सीमा पर अब दिक्कतें बढ़ने जा रही है।

