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अधिक समय तक मोबाइल देखने से हुई आंखें खराब तो भाई ने बनाई आंखों को सुरक्षित रखने वाली डिवाइस, दिल्ली में गोल्ड मेडल

यह डिवाइस है, जिससे छात्र देखता हुआ।
भिण्ड. चम्बल नदी की बीहड़ में बसा उदोतगढ़ गांव के 12वीं कक्षा के छात्र ने ऐसी डिवाइस बनाई है जो स्मार्ट फोन की स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट से आंखों को सुरक्षति रखती है। जब छात्र ने यह प्रोजेक्ट देश दुनिया के सामने रखा तो चारो तरफ प्रशंसा की गयी थी। छात्र का दिल्ली में इंस्पायर अर्वा के तौर पर 19 सितम्बर को भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री डॉ. जितेन्द्रसिंह ने गोल्ड मेडल प्रदान किया है।
उदोतगढ़ के हायर सेकेण्डरी स्कूल में 12वीं के छात्र दीपक वर्ता ने 3 साल पहले देखा था कि उसकी बहन की आंखें कम उम्र में ही खराब हो गयी है। उसके चश्मा लग गया है। आंखें खराब होने की वजह डॉक्टरों ने बताया कि गुडि़या अधिक समय तक मोबाइल पर वीडियो देखती थी। इस वजह से आंखें की रोश्नी पर बुरा असल पड़ा है। यह बात सुनकर दीपक के मन में उत्सुकता जागी कि मोबाइल से निकलने वाली घातक रोशनी से आंखों को बचाने के लिये उपाय किया जाये।
35 सेंटीमीटर पर दूरी पर डिवाइस हो जाती एक्टिव
छात्र को शिक्षक ने बताया था 25 सेंटीमीटर से कम दूरी पर लगातार मोबाइल की स्क्रीन को देखा जाता है तो आंखों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इन सबके बीच में शिक्षक मनोज कौशल के मार्गदर्शन में छात्र दीपक वर्मा ने यह डिवाइस के यंत्र ग्वालियर जाकर खरीदे और उनको सिस्टमैटिक तरीके से लगाया जहां शिक्षक ने बताया था। 25 सेंटीमीटर से कम दूरी नहीं होना चाहिए वहीं छात्रा ने इस दूरी को बढ़ाते हुए 35 सेंटीमीटर रखा और इससे कम दूरी होने पर डिवाइस में वीप की आवाज आती है। 10 सेकंड के समय में यदि मोबाइल को आंखों के संपर्क से दूर नहीं किया गया तो डिवाइस एक्टिव होकर मोबाइल की स्क्रीन को बंद कर देती है।

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