MP में आर्थिक विकास को गति देने के लिए एक साथ कई मोर्चों पर काम करेगी सरकार
भोपाल. MP में आर्थिक विकास को गति देने के लिए शिवराज सरकार एक साथ कई मोर्चों पर काम करेगी। इसमें केंद्र सरकार का भरपूर साथ भी मिलेगा और राज्य भी अपनी आमदनी बढ़ाएगा। केंद्रीय करों में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी इस बार 72 हजार 860 करोड़ रुपये की रहेगी। वहीं, राज्य के करों से 64 हजार 107 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे।
पूंजीगत व्यय के लिए 48 हजार 800 करोड़ रुपये बजट में रखे गए हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि अर्थव्यवस्था को गतिशील बनाए रखने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। कोरोना संकट के कारण जब आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो गईं थीं, तब शिवराज सरकार ने 44 हजार 152 करोड़ रुपये अधोसंरचना विकास के कार्यों पर व्यय किए थे। सरकार के इस प्रयास को न सिर्फ केंद्र सरकार ने सराहा बल्कि अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी दी। शहरी अधोसंरचना विकास के साथ-साथ अब ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए ग्रामीण विकास विभाग के बजट में 74 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। दस हजार करोड़ रुपये तो सिर्फ प्रधानमंत्री आवास के लिए रखे गए हैं। पंचायत और नगरीय निकायों को पांचवें वित्त आयोग के तहत अब पांच प्रतिशत अधिक राशि दी जाएगी। इसका उपयोग वे ग्रामीण विकास में कर सकेंगे।
अनुसूचित जाति-जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के व्यक्तियों को रोजगार के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए नई योजनाएं प्रारंभ की जा रही हैं तो प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्थाओं के सशक्तीकरण के लिए एक हजार करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। ऊर्जा विभाग का बजट भी बढ़ाकर 16 हजार 506 करोड़ किया गया है ताकि ऊर्जा परियोजनाओं पर तेजी से काम हो सके। स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए 10 हजार 380 करोड़ रुपये रखे गए हैं।

