MP के अस्पतालों में गोली गटकने तक का पानी नहीं, सिंधिया के क्षेत्र ग्वालियर-चंबल में भी हालात बदतर
भोपाल. आज विश्व जल दिवस है और मध्यप्रदेश में गर्मी पड़नी भी शुरू हो चुकी है। सरकार हर साल ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपए खर्च करती है। इसके बावजूद गांवों के सरकारी अस्पताल पानी की कमी से जूझ रहे हैं। प्रदेश में 2200 से ज्यादा सरकारी अस्पताल ऐसे हैं, जहां पानी की कमी से मरीज को स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। ये खुलासा स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट से ही हुआ है। जलसंकट के कारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और पीएचसी लेवल के कई अस्पतालों में प्रसव नहीं हो पा रहे। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के गृह जिले छिंदवाड़ा में सबसे ज्यादा 290 सरकारी अस्पतालों में पानी का संकट है। यही नहीं आदिवासी क्षेत्रों और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के ग्वालियर-चंबल अंचल के अस्पतालों में भी पानी नहीं है। कई अस्पतालों में दवा खाने तक के लिए समय पर पानी नहीं मिल पाता है।
मरीज ही नहीं, स्टाफ भी परेशान
इसके अलावा नजीराबाद, फंदा, तूमड़ा, गुनगा, धमर्रा, रूनाहा, बरखेडी देव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी यहीं हाल हैं। आदमपुर, भौंरी, गोल, अरवलिया, जमुनियांकला, मुंड़ला, रसूलिया पठार, गढ़ा कला, सूरजपुरा, नया समंद, खितमास, बरखेड़ा बरमाड, निपानिया सूखा, मुगालिया छाप, खजूरी सड़क, टीलाखेड़ी, दीपड़ी के उप स्वास्थ्य केंद्रों में पानी की कमी के कारण मरीज ही नहीं स्टाफ भी परेशान है। कर्मचारियों की मानें तो पानी की कमी के कारण आए दिन अस्पतालों में विवाद की स्थिति बन रही है।
सिंधिया के क्षेत्र में भी पानी के तरस रहे अस्पताल
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के क्षेत्र ग्वालियर-चंबल अंचल में सैकड़ों अस्पतालों में पानी का संकट बना हुआ है। शिवपुरी जिले में 173, गुना में 104, भिंड में 168 अस्पताल पानी की कमी से जूझ रहे हैं। हर घर नल का जल पहुंचाने का दावा करने वाले पीएचई मंत्री बृजेन्द्र सिंह यादव के गृह जिले अशोकनगर में 22 अस्पताल पानी की कमी से त्रस्त हैं।

