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MP में होगी 1.50 लाख शिक्षकों की हो सकती है छंटनी, टीईटी परीक्षा में फेल होने पर बाहर होंगे

भोपाल. एमपी के लगभग 1.50 लाख शिक्षकों की नौकरी पर संकट मंडराने लगा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर कहा है। जिन शिक्षकों की नियुक्ति टीचर ऐलीजिबिलटी टेस्ट (टीईटी) पास करना अनिवार्य होगा। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) भाोपाल ने हाल ही में सभी संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किये गये है। इसके अनुसार ऐसे शिक्षक जिनकी सेवानिवृत्ति में भी 5 वर्ष से अधिक समय बचा है। उन्हें अनिवार्य रूप से टीईटी परीक्षा देनी होगी।
टेस्ट के लिये 2 वर्ष तय हो समय सीमा
स्कूल शिक्षा विभाग ने यह कदम सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर उठाया गया है। आदेश में स्पष्ट किया है कि संबंधित शिक्षकों को आदेश जारी होने की तारीख से 2 वर्ष के अन्दर टीईटी परीक्षा पास करना अनिवार्य होगा। अगर कोई शिक्षक तय समय-सीमा में टीईटी पास नहीं करता है तो उसे सेवा से हटाया जा सकता है।
जुलाई-अगस्त 2026 में तय प्रस्तावित परीक्षा
संचालनालय ने अधिकारियों को निर्देश दिया हैकि प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में कार्यरत ऐसे टीचर की पहचान कर उन्हें परीक्षा में शामिल होने की सूचना दें। शिक्षा विभाग के मुताबिक टीईटी परीक्षा जुलाई-अगस्त 2026 में आयोजित करने का प्रस्ताव है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि नियुक्ति या पदोन्नति के इच्छुक उम्मीदवारों के लिये भी टीईटी पास आवश्यक है।
शिक्षा विभाग का आदेश बेहद चिंताजनक-वासुदेव शर्मा
आउटसोर्स कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने स्कूल शिक्षा विभाग के हालिया आदेश को शिक्षकों के लिए बेहद चिंताजनक बताया है। अध्यापक संवर्ग 1995 से स्कूलों में पढ़ा रहा है। उनकी नियुक्तियां मेरिट के आधार पर हुई थीं।
2005 तक मेरिट के आधार पर भर्ती होती रही, जबकि इसके बाद 2011 तक व्यापमं के माध्यम से पात्रता परीक्षा के जरिए नियुक्तियां की गईं। अब शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 (RTE) के नियमों के आधार पर इन शिक्षकों के लिए TET परीक्षा पास करना अनिवार्य किया जा रहा है।
15-20 साल बाद परीक्षा देना शिक्षकों के लिए मुश्किल
शर्मा ने कहा कि कई शिक्षकों को पढ़ाई छोड़े 15 से 20 साल हो चुके हैं। ऐसे में उनके लिए यह परीक्षा पास करना बेहद कठिन होगा। बड़ी संख्या में शिक्षक परीक्षा में सफल नहीं हो पाएंगे और उन्हें सेवा से हटाया जा सकता है।
वासुदेव शर्मा का आरोप है कि सीएम राइज स्कूल योजना के कारण छोटे सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि इससे आने वाले समय में बड़ी संख्या में शिक्षक सरप्लस हो सकते हैं, जिससे नौकरी पर संकट खड़ा हो सकता है।

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