MIC-भोपाल की शहर सरकार के मंत्रिमंडल में को लेकर कलह, भाजपा विधायक कृष्णा गौर ने बुलाई बैठक बोली-नाराज हैं इसलिये दिये इस्तीफे

भोपाल. मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में ‘शहर सरकार’ के मंत्रिमंडल में विभागों के बटवारे के बाद ही भारतीय जनता पार्टी के नेताओं में कलह की स्थिति बनी गयी है। गोविंदपुरा विधायक कृष्णा गौर ने बंटवारे पर कड़ी आपत्ति और नाराजगी जताई है। रात में ही उनके दो समर्थक मेयर इन काउंसिल यानी MIC मेम्बर ने इस्तीफे दे दिये थे। वहीं शनिवार को विधायक कृष्णा गौर के बंगले पर गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र के पार्षदों की बैठक बुलाई गयी। इसमें प्रमुख नेता भी शामिल है। विधायक गौर ने कहा कि 45 वर्ष से गोविंदपुरा विधानसभा भाजपाए का गढ़ है। शहर सरकार को विधानसभा क्षेत्र का सम्मान रखना था। MIC मेम्बर नाराज है। इसीलिये ही इस्तीफे दिये हैं। वह मुझसे बात करने आये। उनसे चर्चा की है। संगठन में भी अपनी बात रखी है।
आपको बता दें कि महापौर मालती राय ने शुक्रवार की शाम को MIC सदस्यों की बैठक ली थी और इसके बाद विभागों के बटवारा किया गया था। बंटवारे के लगभग 4 घंटे बाद ही कलह की स्थिति बन गयी। MIC सदस्य जितेन्द्र शुक्ला और छाया ठाकुर ने विभागों से इस्तीफे दे दिये। शुक्ला को वित्त एवं लेखा और ठाकुर को शही गरीबी एवं उपशमन विभाग मिले थे।
विभाग से इस्तीफा फिर भी MIC मेम्बर नहीं
नगरनिगम के चुनाव में गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के कुल 17 पार्षद जीते हैं। इनमें से 2 को MIC में शामिल किया गया है जबकि उन्होंने विभागों से अपने इस्तीफे दे दिये थे। यानी वह एमआईसी मेम्बर तो हैं, लेकिन विभाग नहीं रखना चाहते हैं।

सुबह से जुटे समर्थक पार्षद, विधायक ने ली बैठक
विभागों के बंटवारे से उठी कलह के बाद शनिवार सुबह से पार्षद और समर्थक विधायक गौर के बंगले पर जुटने लगे। दोपहर 12 बजे विधायक ने सभी की मीटिंग भी ली। हालांकि, मीटिंग में क्या चर्चा हुई, ये सामने नहीं आया है। लेकिन बंटवारे पर जमकर नाराजगी जताई। खुद विधायक नाराज दिखाई दी। उन्होंने बताया, महापौर की जीत में गोविंदपुरा विधानसभा का बड़ा योगदान रहा है। ऐसे में अपेक्षा थी कि महापौर पर्याप्त सम्मान MIC के बंटवारे में देंगी, लेकिन दूसरी विधानसभाओं की तुलना में गोविंदपुरा विस की उपेक्षा की गई है। MIC के बंटवारे पर पुनर्विचार होना चाहिए। संगठन को बिना विश्वास में लिए एमआईसी का फैसला लिया गया है। एमआईसी बंटवारे को लेकर निश्चित रूप से आपत्ति है।
अंदरखाने से… सबकी चली, कृष्णा गौर को छोड़कर
नगर निगम में मेयर इन कौंसिल (MIC) सदस्यों को विभागों के बंटवारे में बीजेपी के सभी सीनियर नेताओं की चली, सिर्फ विधायक गौर को छोड़कर। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, मंत्री विश्वास सारंग, प्रदेश महामंत्री भगवानदास सबनानी, जिलाध्यक्ष सुमित पचौरी, विधायक रामेश्वर शर्मा आदि की पसंद को ध्यान में रखा गया, लेकिन 17 पार्षदों को जीताने में महत्वपूर्ण किरदार रही विधायक गौर की नहीं चली। विभागों के बंटवारे पर इतना विवाद इसलिए भी है कि अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इसलिए जनता से जुड़े पानी, सफाई, बिजली, निर्माण कार्य जैसे विभागों पर सबकी नजर थी। यही विभाग ऐसे हैं, जो जनता से सीधे जोड़ते हैं। मंत्री-विधायक और सीनियर लीडर यही चाहते थे कि उनके समर्थकों को ये विभाग मिल जाए। ताकि, चुनाव के दौरान फायदा मिल सके।

