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MP में बदलेंगे बिजली टैरिफ के नियम, उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

भोपाल. बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने और बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। मप्र विद्युत नियामक आयोग (एमपीईआरसी) ने 2027-28 से 2031-32 तक लागू होने वाले नए मल्टी ईयर टैरिफ (एमवाईटी) ढांचे पर काम शुरू कर दिया है। इस व्यवस्था के तहत बिजली कंपनियों के खर्च, बिजली खरीद, फ्यूल चार्ज, आधारभूत संरचना विकास, नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले वित्तीय भार की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। नए नियमों को वितरण विनियम-2026 के रूप में अधिसूचित किया जाएगा। आयोग का उद्देश्य बिजली क्षेत्र में मौजूद नियामकीय बाधाओं को दूर करना, कंपनियों की कार्यप्रणाली में जवाबदेही बढ़ाना और उपभोक्ताओं को न्यायसंगत दरों पर बिजली उपलब्ध कराना है।
इन प्रमुख बिंदुओं पर बनेगा रोडमैप
फ्यूल चार्ज की तकनीकी जांचः वर्तमान व्यवस्था में बिजली उत्पादन और खरीद की लागत बढ़ने पर कंपनियां हर माह फ्यूल कॉस्ट एडजस्टमेंट फ्यूल चार्ज के माध्यम से अतिरिक्त राशि उपभोक्ताओं से वसूलती हैं। आयोग अब यह परखेगा कि ईंधन लागत के नाम पर लगाए जाने वाले शुल्क वास्तव में कितने उचित हैं।
पांच वर्षों की जरूरतः नया मल्टी ईयर टैरिफ केवल बिजली दरें तय करने तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें अगले पांच वर्षों की बिजली मांग, बिजली खरीद लागत, बिक्री का पूर्वानुमान, नवीकरणीय ऊर्जा की खरीद, संचालन एवं रखरखाव खर्च, मूल्यह्रास (डिप्रिसिएशन), क्रॉस सब्सिडी अधिभार जैसे विषयों का व्यापक अध्ययन किया जाएगा।
मूल्यह्रास और अनुदान खर्च पर निगरानीः बिजली कंपनियां अपनी परिसंपत्तियों के मूल्यह्रास को भी टैरिफ में शामिल करती हैं। जैसे मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में 384 करोड़ की परिसंपत्तियों का मूल्यह्रास दर्ज था, जिसका असर बिजली दरों पर पड़ता है। नए नियमों में ऐसे खर्चों की समीक्षा होगी। वहीं अनुदान की भी समीक्षा होगी।
सोलर ऊर्जा को मिलेगा बढ़ावाः आयोग सौर ऊर्जा को बढ़ाने पर भी विचार कर रहा है। यदि बिजली मिश्रण में नवीकरणीय ऊर्जा का अनुपात बढ़ता है तो दीर्घकाल में बिजली उत्पादन लागत नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। इससे पर्यावरणीय लाभ के साथ-साथ उपभोक्ताओं को भी प्रतिस्पर्धी दरों पर बिजली उपलब्ध हो सकेगी।

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MP के 9 पुलिस अफसर बनेंगे IPS, प्रमोशन के लिए 25 जून को भोपाल में बडी मीटिंग, ग्वालियर से सुमन गुर्जर व सत्येंद्र सिंह तोमर पर विचार किया गया

भोपाल. साल 2025 के लिए राज्य पुलिस सेवा के नौ अधिकारी इस वर्ष आईपीएस संवर्ग में पदोन्नत होंगे। इसके लिए 25 जून को भोपाल में डीपीसी होगी, जिसमें संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य भी सम्मिलित होंगे। इसके लिए 1997 बैच के सीताराम, अमृत मीणा, वर्ष 1998 बैच के निमिषा पांडेय, राजेश मिश्रा, मलय जैन, अमित सक्सेना, मनीषा सोनी, सुमन गुर्जर, संदीप मिश्रा, सब्यसाची सर्राफ, समर वर्मा, सत्येंद्र सिंह तोमर समेत कुल 27 नामों को विचार में लिया गया है।
राज्य प्रशासनिक सेवा से आईएएस में 13 अधिकारियों की पदोन्नति
उधर, राज्य प्रशासनिक सेवा से आईएएस में 13 अधिकारियों की पदोन्नति होनी है, जिसमें 2007 और 2008 बैच के अधिकारियों को विचार की परिधि में रखा गया है। हालांकि, डीपीसी की तारीख अभी तय नहीं है।
देशमुख और मीनाक्षी केंद्र के लिए इंपैनल
डीजी विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त योगेश देशमुख और मप्र भवन दिल्ली में पदस्थ एडीजी मीनाक्षी शर्मा को केंद्र में प्रतिनियुक्ति के लिए इंपैनल किया गया है। दोनों अधिकारी केंद्र में जाते हैं तो उन्हें डीजी स्तर का पद मिलेगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 33 आईपीएस अधिकारियों की सूची जारी की है, जिसमें मप्र के दो हैं।

 

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ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में 10 लाख कैश छोड़कर उतरा इंजीनियर, बैग में भरकर दिल्ली से लाया था कैश

ग्वालियर. ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर एक कंपनी के इंजीनियर का करीब 10 लाख रुपए से भरा सूटकेस गायब हो गया। सूचना मिलते ही जीआरपी पुलिस सक्रिय हो गई और 2 से 3 घंटे के भीतर सूटकेस को बरामद कर लिया है। दरअसल, जिंदल कंपनी में इंजीनियर पद पर कार्यरत राजीव खन्ना दिल्ली से ग्वालियर के लिए गतिमान एक्सप्रेस से सफर कर रहे थे। वे ट्रेन के कोच नंबर सी-8 की सीट नंबर 30 पर यात्रा कर रहे थे। उनके पास एक सूटकेस था, जिसमें करीब 10 लाख रुपए नकद रखे हुए थे। ग्वालियर रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद जब वे ट्रेन से उतरे तो उन्हें ध्यान आया कि उनका सूटकेस गायब है।

जीआरपी ने बैग बरामद कर इंजीनियर को सौंप दिया। - Dainik Bhaskar
रेलवे स्टेशन पर लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाली
सूटकेस में बड़ी रकम होने के कारण राजीव खन्ना घबरा गए और तत्काल जीआरपी बीजी थाना पुलिस को सूचना दी। शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी। रेलवे स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई और ट्रेन में मौजूद स्टाफ तथा अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ की गई।

500 के नोटों की 20 गड्डियों में ₹10 लाख रुपए थे।
पुलिस ने सूटकेस को अपने कब्जे में लेकर पुष्टि कराई
जांच में पता चला कि सूटकेस ट्रेन में ही रह गया था। संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर ट्रेन की लोकेशन ट्रेस की गई। जांच के दौरान ग्वालियर और दतिया के बीच ट्रेन में ही सूटकेस सुरक्षित मिल गया। पुलिस ने सूटकेस को अपने कब्जे में लेकर उसकी पुष्टि कराई और बाद में राजीव खन्ना को सौंप दिया।
करीब 10 लाख रुपए से भरा सूटकेस सुरक्षित वापस मिलने के बाद राजीव खन्ना के चेहरे पर खुशी लौट आई। उन्होंने पुलिस और रेलवे अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता था।

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MP में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी, 155 अफसर और 723 पटवारियों के तबादले

भोपाल. सरकार ने राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों की तबादला सूची जारी कर दी है। इंदौर में बड़ा फेरबदल किया गया, जिसमें सबसे चौंकाने वाला नाम एडीएम रोशन राय का है। उन्हें मैहर अपर कलेक्टर बनाया गया, तो रिंकेश वैश्य को अधिकृत अपर कलेक्टर नियुक्ति किया गया। एसडीएम के अलावा 20 से अधिक पटवारी विभिन्न जिलों से इंदौर पदस्थ किए गए।
155 अफसरों को इधर से उधर
सरकार के तबादलों से रोक हटने के बाद लंबे समय से राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों की सूची का इंतजार किया जा रहा है। आखिरकार देर रात को आदेश जारी हो गया, जिसमें कुल 155 अफसरों को इधर से उधर किया गया तो 723 पटवारियों के भी जिले बदले गए। माना जा रहा है कि पहली बार इतनी लंबी सूची जारी की गई है, जिसमें इंदौर को ही 20 नए पटवारी मिल गए हैं, जबकि जाने वाले की संख्या सिर्फ एक ही है। आदेश में सबसे चौंकाने वाला नाम एडीएम रोशन राय का है। उन्होंने ब्रिक्स सम्मेलन से लेकर पूर्व कई बड़े आयोजन का प्रोटोकॉल अच्छे से संभाला तो साफ सुथरी छवि होने की वजह से उन्हें पसंद भी किया जाता है।
इधर, एक साल पहले संभागायुक्त दीपक सिंह के आदेश के बाद से नागरिक आपूर्ति निगम में पदस्थ रिंकेश वैश्य अपर कलेक्टर का दायित्व संभाल रहे थे, अब उन्हें अधिकृत नियुक्त कर दिया गया। इसके अलावा नरेंद्र नाथ पांडे को नगर निगम से एमपीआइडीसी इंदौर का एमडी बनाया गया तो पिछले दिनों प्रमोशन से अपर कलेक्टर बने गोपाल वर्मा व राकेश मोहन त्रिपाठी का भी इंदौर से तबादला कर दिया गया।
चर्चित 8 उपयंत्रियों का फिर तबादला
व्यापमं के जरिए नगर निगम में भर्ती हुए तकरीबन 13 उपयंत्रियों को सालभर पहले यानी 13 जून-2025 को इंदौर से बाहर कर दिया गया था, जो कि निगम के जोनों पर बिल्डिंग परमिशन शाखा में बिल्डिंग अफसर (बीओ) और बिल्डिंग इंस्पेक्टर (बीआइ) बनकर नक्शे पास करने का काम करते थे। नगरीय आवास एवं विकास विभाग के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायकों, एमआइसी मेंबरों और कई पार्षदों की शिकायतों के साथ लोगों का काम न करने के चलते इन उपयंत्रियों का तबादला हुआ था। जिन 13 उपयंत्रियों का तबादला हुआ था, उनमें से 8 हाईकोर्ट से स्टे लाने के साथ किसी न किसी जुगाड़ से निगम में वापस आ गए।
थोड़े दिन तक उपयंत्री लूप लाइन में रहे, लेकिन किसी न किसी तरीके से महत्वपूर्ण विभागों में पदस्थ हो गए। साथ ही बिल्डिंग परमिशन शाखा में नक्शा पास करने के लिए फिर से बीओ बन गए, लेकिन कल रात जारी हुए तबादला आदेश में उपयंत्रियों को दो साल की प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है।
किस उपयंत्री को कहां भेजा
उपयंत्री अंकेश बिरथरिया को सागर, शैलेंद्र मिश्रा को रतलाम, शिवराज यादव को सतना, उद्देश्य तिवारी को सिंगरौली, अंकुश चौरसिया को खंडवा, राहुल रघुवंशी को जबलपुर, प्रभात तिवारी को रीवा, विनोद अग्रवाल को छिंदवाड़ा नगर निगम में प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है।
इंदौर सेंट्रल जेल अधीक्षक अलका सोनकर का ट्रांसफर हो गया है। उन्हें जेल मुख्यालय भोपाल में पदस्थ किया गया है। उनके स्थान पर भोपाल मुख्यालय में पदस्थ दिनेश नरगांवे को सेंट्रल जेल भेजा गया है। भोपाल जेल अधीक्षक को भी ट्रांसफर कर दिया है। उनके स्थान पर किसी की नियुक्ति नहीं हुई है। इधर देपालपुर जेल के सहायक अधीक्षक रामसहाय कुशवाह और जिला जेल में पदस्थ हेमंत नागर का तबादला जिले से बाहर कर दिया गया है।

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ग्वालियर से स्थानांतरित हुए अधिकारियों को निगमायुक्त ने किया भार मुक्त

ग्वालियर – नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय ने गत दिवस मध्य प्रदेश शासन द्वारा किए गए निगम अधिकारियों के स्थानांतरण को लेकर सभी संबंधित अधिकारियों को नवीन पदस्थापना वाले स्थल के लिए नगर निगम ग्वालियर से भार मुक्त किया है।
निगमायुक्त संघ प्रिय द्वारा जारी आदेशानुसार रजनी शुक्ला अपर आयुक्त वित्त, अमर सत्य गुप्ता सहायक आयुक्त,पवन सिंघल सहायक यंत्री,महेन्द्र अग्रवाल उपयंत्री, बृज किशोर त्यागी उपयंत्री, श्रीमती शिल्पा दिनकर उपयंत्री नगर निगम ग्वालियर, श्री सिद्धार्थ तिवारी स्वच्छता निरीक्षक, आकांक्षा दुबे स्वच्छता निरीक्षक,अंकित परिहार उद्यान पर्यवेक्षक को शासन द्वारा की गई नवीन पदस्थापना के आदेष के परिपालन में नगर निगम ग्वालियर से भारमुक्त किया गया।

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मुरार नदी पार टाल पर चला विशेष सफाई अभियान, 350 किलो कचरा हटाया गया

ग्वालियर – जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत नगर निगम ग्वालियर द्वारा लगातार शहर के विभिन्न जल स्रोतों पर स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। शुक्रवार की सुबह मुरार नदी पार टाल क्षेत्र में विशेष सफाई अभियान चलाया गया। अभियान का नेतृत्व अपर आयुक्त प्रदीप तोमर एवं उपायुक्त मुकेश बंसल ने किया। सफाई अभियान के दौरान पार्षद सुरेश सोलंकी सहित अधिकारी एवं कर्मचारी एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
नगर निगम आयुक्त श्री संघ प्रिय के निद्रेषानुसार मुरार नदी किनारे लंबे समय से जमा सूखे कचरे को नगर निगम के अमले और स्थानीय नागरिकों के सहयोग से साफ किया गया। सफाई कार्य के दौरान लगभग 350 किलोग्राम कचरा एकत्रित किया गया, जिसे वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण के लिए केदारपुर कचरा निस्तारण केंद्र भेजा गया। अधिकारियों ने आमजन से अपील की कि नदी, नालों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा न फेंकें तथा स्वच्छता बनाए रखने में नगर निगम का सहयोग करें। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी से ही स्वच्छ और सुंदर शहर का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

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पत्नी दौडा़-दौड़ाकर पीते हुए कर दी हत्या, खाना परोसने को लेकर हुआ था झगड़ा

मुरैना. दिमनी इलाके स्थित सहरियन का पुरा गांव में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी की सिर में सरिया मारकर बेहरमी से हत्या कर दील। सोमवार की दोपहर खाना परोसने को लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ था। मारपीट से तंग आकर जब पत्नी पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने जा रही थी। पति ने पीछा कर खेत के पास इस घटना को अंजाम दिया। पुलिस ने हत्या की एफआईआर दर्ज कर फरार आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।
दोपहर लगभग 2 बजे आरोपी धर्मेन्द्र जाटव का अपनी पत्नी निशा से खाना परोसने की बात पर विवाद हो गया था। धर्मेन्द्र ने गुस्से में आकर निशा को लात-घूंसों और डंडे से बुरी तरह पीटा। वह देर शाम तक उसे पीटता रहा। मारपीट से परेशान होकर निशा रिपोर्ट दर्ज कराने दिमनी थाने पहुंची थी। इसी दौरान धमेन्द्र ने पीछा करते हुए खेत के पास निशा क सिर पर पीछे से लोहे के सरिये से 2 बार जानलेवा हमला कर दिया। गंभीर चोट और अत्याधिक खून बहने से उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गयी।
शरीर पर लात-घूंसों से पीटने के निशान
दिमनी थाना प्रभारी (TI) जितेंद्र दोहरे ने बताया, मृतका के शरीर पर चोट के काफी निशान हैं। पति ने उसके साथ बुरी तरह मारपीट की है। हत्या सिर पर लोहे का सरिया मारने से हुई है, लेकिन शरीर पर लात-घूंसों के निशान भी स्पष्ट रूप से मौजूद हैं। वहीं, डीएसपी (मुख्यालय) विजय भदौरिया ने कहा, मृतका मारपीट की रिपोर्ट दर्ज कराने थाने जा रही थी, तभी पति ने सिर पर हमला कर उसकी हत्या कर दी। आरोपी पति फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई की जा रही है।

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बालाजी सिक्योरिटी बिजली विभाग से ब्लैक लिस्टेड, जीवाजी विश्वविद्यालय से मैन पॉवर हथियाने के लिये दिया झूठा शपथ पत्र

ग्वालियर. जीवाजी विश्वविद्यालय में ब्लैक लिस्टेड बालाजी एजेंसी ने सच्चाई छिपाते हुए अधिकारियों से सांठगांठ कर जेयू में मेन पॉवर का ठेका हथिया लिया है। इस संबंध में कर्मचारी नेता ने जेयू के अधिकारियों से झूठा शपथ पत्र देने के मामले में पुलिस में शिकायत करने की मांग की है। वैसे तो मैन पॉवर और सुरक्षा के नये ठेका को लेकर विवाद बढ़ने की स्थिति बन गयी है। इन्दौर की बालाजी सिक्योरिटी सर्विसेज प्रायवेट लिमिटैड ने एमपीईबी से ब्लैक लिस्टेड होने की सच्चाई छिपाकर सांठ-गांठ कर जीवाजी विश्वविद्यालय मैन पॉवर का ठेका हथियाने का चौंकाने वाला मामले की पोल खुली है।
मध्यप्रदेश राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इंटक) के प्रदेश सचिव अशोक गोस्वामी ने इसे चालबाज एजेंसी के पूरे कारनाम की पोल खोल दी है। बिजली विभाग से बालाजी सिक्योरिटी को ब्लैक लिस्ट करने की आदेश की सत्यापित प्रति प्राप्त आरटीआई के माध्यम से हासिल की है। इसके अलावा जीवाजी विश्वविद्यालय में इस एजेंसी ने ठेका लेने के लिये झूठा शपथ पत्र दिया था उसकी भी आरटीआई के तहत सत्यापित प्रति हासिल की है।
जेयू में दिया झूठा शपथ-पत्र, आपराधिक मुकदमा दर्ज कराये कुलसचिव
इंटक नेता अशोक गोस्वामी ने जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलसचिव को उक्त साक्ष्यों के साथ लिखित शिकायत देकर बालाजी सिक्योरिटी सर्विसेज प्रायवेट लिमिटेड इन्दौर ने टेंडर प्रक्रिया के दौरान अहम जानकारी छिपाकर अनुबंिध प्राप्त किया। शिकायत के मुताबिक जीवाजी विश्वविद्यालय द्वारा उक्त कंपनी को विश्वविद्यालय परिसर में सफाई, सुरक्षा एवं मानव बल उपलब्ध कराने का कार्य सोंपा गया है। कुलसचिव को दिये गये पत्र में कहा गया है कि सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों से यह खुलासा हुआ है कि संबंधित कंपनी के खिलाफ मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में कार्यवाही की गयी थी।
शिकायत में इंटक नेता द्वारा आरोप लगाया गया है कि कम्पनी ने टेंडर प्रक्रिया के दौरान अपने खिलाफ हुई कार्यवाही और तथ्यों का खुलासा नहीं करते हुए झूठा शपथ पत्र में भ्रामक जानकारी दी है। आरटीआई के तहत निकाले गये वह दस्तावेज जो जीवाजी विश्वविद्यालय से छिपाये गये है। शिकायत में यह भी गया कि यदि किसी संस्था द्वारा टेंडर प्राप्त करने के लिये तथ्य छिपाये जाते है तो यह सार्वजनिक व्यवस्था और सरकारी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।

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सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे पर हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

ग्वालियर. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने सरकारी जमीन पर कथित अवैध कब्जे जुंड़े फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने जनहित याचिका लगाने वाले चन्द्रेश त्यागी का नाम याचिका से हटा दिया गया है। हाईकोर्ट ने माना है कि स्वयं को सामाजिक कार्यकर्त्ता बताने वाले याचिकाकर्ता ने पर्यावरण संरक्षण का लेकर गंभीरता नहीं दिखाई है। हालांकि सरकारी जमीन पर कब्जे के आरोपों को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने मामले को बंन नहीं किया है। अब स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) के रूप में सुनने का फैसला लिया है।
8 बीघा जमीन पर अवैध कब्जा
याचिका में आरोप लगाया है कि पुरानी छावनी इलाके में लगभग 8 बीघा सरकारी जमीन पर अवैध बाउंड्रीवॉल बनाकर प्लॉट काटे जा रहे है। उन्हेें बेचा जा रहा है। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को पर्यावरण संरक्षण के तहत पौध लगाने और उनकी देखभाल करने का निर्देश दिया था।
पौधे तो लगाये, देखभाल नहीं
जांच में सामने आया है कि याचिकाकर्ता ने औपचारिकता पूरी करते हुए पौधे तो लगाये, लेकिन उनकी देखभाल नहीं की है। इसके चलते सभी पौधे नष्ट हो गये। हाईकोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही माना है। हाईकोर्ट ने नगरनिगम से नये पौधे लगाने और 5 साल तक उनकी देखभाल का खर्च मांगा था। निगम ने इसकी लागत 1 लाख 53 हजार 765 रूपये बताई है। जब हाईकोर्ट ने यह राशि जमा कराने के लिये कहा तो याचिकाकर्ता की तरफ से इंकार कर दिया गया।
हाईकोर्ट ने कहा है कि याचिकाकर्ता का स्वयं का सामाजिक कार्यकर्ता बताना सही साबित नहीं हुआ है। अगर वह वास्तव में समाज और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार होते तो पौधों की देखभाल और खर्च वहन करने से पीछे नहीं हटते।
हाईकोर्ट का आदेश
याचिकाकर्ता चंद्रेश त्यागी का नाम हटाकर मामले को स्वत: संज्ञान जनहित याचिका में बदला गया।
वरिष्ठ अधिवक्ता एफ.ए. शाह को न्याय मित्र नियुक्त किया गया।
मामले की पूरी प्रोसेस फीस याचिकाकर्ता को जमा करनी होगी, नहीं करने पर जुर्माना लगाया जाएगा।
जिला प्रशासन और राजस्व विभाग को विवादित जमीन का सीमांकन कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए।

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आगरा में बीच सड़क बनी मजार को हटाया, हिन्दू नेता ने दायर किया न्यायालय में वाद

आगरा. पुलिस प्रशासन ने एमजी रोड पर आगरा कॉलेज के सामने बीच सड़क स्थित विवादित मजार को हटाने की बड़ी कार्यवाही शुरू कर दी है। यातायात बाधित होने और हादसों की आशंका की वजह से इस मजार को हटाने की मांग लम्बे समय से हो रही थी। प्रशासन और संबंधित पक्षों के बीच कई दौर की चर्चा के बाद सहमति बनी। जिसके तहत अब कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच पुलिस बल की मौजूदगी में मजार को शिफ्ट किया जा रहा है।इस बीच सुरक्षा के मद्दे नजर एमजी रोड के इस रास्ते को रोक दिया गया है।
हिन्दूवादी नेता ने कोटा में दायर किया था वाद
इस मजार को लेकर लम्बे समय से कानूनी विवाद भी चल रहा था। हिन्दूवादी नेता कुंवर अजयतोमर ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से दोनों मजारों के ध्वस्तीकरण की मांग को लेकर अपन सिविल जज(सीनियर डिवीजन) की अदालत में वाद दायर किया था। वादी का आरोप था कि यह मजार और दरगाह सरकारी भूमि पर बनी है।

 

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