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केन्द्रीय जेल में पहुंची हजारों बहनें भाईयों को राखी बांधने तो बहनों के छलके आंसू, खानपान सामग्री लाने पर रोक

सेंट्रल जेल ग्वालियर में बंदी भाई की कलाई पर राखी बांधती बहनें - Dainik Bhaskar
ग्वालियर. शनिवार को केन्द्रीय जेल में रक्षाबंधन के मौके पर बंद कैदी भाईयों को उनकी बहनों ने राखी बांधी है। सैकड़ों बहनों खुली जेल में अपने भाईयों से मिलकर उन्हें मंगल तिलक कर कलाई पर राखी बांधी है। बहनें आसपास के शहरों से सुबह ग्वालियर की सेंट्रल जेल पहुंची, वैसें तो राखी का शुभ मुहूर्त दोपहर 10.47 बजे के बाद का था। लेकिन सेंट्रल जेल में बिना मुहूर्त ही बहनों ने भाईयों से मिलकर राखी बांधी है। दोपहर 2.30 बजे तक लगभग 8 हजार से अधिक बहनों सेंट्रज जेल पहुंची है और शाम तक 15 हजार से अधिक बहनों के पहुंचने की संभावना है।
जेल में बन्द भाईयों के माथे पर तिलक करते समय बहन-भाई दोनों के आंसू छलक आये। जेल में बने लड्डू और राखी किट से बहन रोली चावल से तिलक किया और बहन-भाईयों ने एक-दूसरे को लड्डू खिलाकर मुंह मीठा कराया है। जेल प्रशासन ने बाहर से कोई भी मिठाई, राखी या अन्य सामग्री अंदर नहीं लाने दी है। जेल प्रबंधन ने बंदी भाईयों को राखी बांधने आने वाली बहनों को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहो। इसके लिये खुली जेल के मैदान में टेंट लगाकर रक्षाबंधन की मुलाकात कराई है।

जेल परिसर में बड़ी संख्या में पहुंची बहनें।
नशीला पदार्थ और खान-पान सामग्री और मोबाइल पर रोक
जेल अधीक्षक विनीत सरवईया ने बताया कि रक्षाबंधन पर इस बार बहनों को राखी के लिये जेल में आने की जेल मुख्यालय से अनुमति दी गयी है। बहनें जेल आकर यहां पर सजाकाट रहे अपने भाईयों का मंगल तिलक कर राखी बांध रही है। वहीं, दूसरी ओर जेल में अपने भाईयों को राखी बांधने आने वाली महिलाओं को अपने साथ खान पान का सामान लाने के लिये प्रतिबंधित किया है। अनाउसमेंट के जरिये महिलाओं को बताया जा रहा था। वह किसी प्रकार की चीज अपने साथ जेल के अंदर न लाये अगर कोई भी चीज अंदर लेकर आती है तो उनकी मुलाकात नहीं करवाई जायेगी और उनके खिलाफ कार्यवाही की जायेगी।
भाइयों को राखी बांध सैकड़ों बहनें खुश
जेल में बंद बंद भाई से मिलने आई काजल ने बताया है कि रक्षाबंधन के मौके पर वह भाई से मिलने सुबह 7:00 से आई थी। खुली जेल में भाई से मिलकर उन्हें राखी बांधी है और मिठाई भी खिलाई है। भाई से मिलकर बहुत अच्छा लग रहा है, जेल में बहुत ही अच्छा इंतजाम किया गया था। बहन आरती का कहना है कि मैं अपने भाई मनोज को राखी बांधने आई थी। बहुत ही अच्छी व्यवस्था रखी गई है लेकिन काफी भीड़ थी। भीड़ के कारण महिलाओं में धक्का-मुक्की हो रही थी। मैंने अपने भाई से खुली जेल में मुलाकात कर राखी बांधी है। मैं अपने भाई के साथ करीब तीन से चार घंटे मिली हू और उनका हाल-चाल जाना है।
बंदियों के लिए बनी है पूड़ी, सब्जी, खीर
जेल में सजा काट रहे बंदियों के लिए जेल प्रबंधन ने त्योहार के खाने की व्यवस्था की है। रक्षाबंधन के त्योहार पर जेल में बंदियों के लिए हर बार की तरह है पूड़ी, सब्जी के साथ ही खीर बनाई गई है। यह खाना जेल में बंद अन्य कैदियों ने बनाया है। रक्षाबंधन पर जब बहन तिलक करेंगी तो उसके लिए लड्डू बनाए हैं, जो बहनों को जेल परिसर से ही खरीद कर जेल के अंदर ले जा रही हैं।
जेल के तीन पॉइंट पर हो रही है महिलाओं की जांच
जेल में किसी प्रकार की सामग्री अंदर नहीं जा सके इसके लिए तीन स्थानों पर चेकिंग व्यवस्था लगाई है। सिर्फ महिलाओं को जेल में प्रवेश मिल रहा है। सेंट्रल जेल में बाहरी पुरुषों का प्रवेश पूर्ण तौर से निषेध किया है। मिलाई के लिए जेल मैदान में टेंट लगाया गया है, जहां पर बैठ कर बहन अपने भाइयों को राखी बांध रही हैं।

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