अहिल्याबाई होलकर जी की 300वीं जयंती व्यक्ति का चरित्र ही उसको महान बनाता हैरू श्रीधर पराड़कर

राजमाता एक आदर्श व्यक्तित्व थींरू डॉण् राजकुमार आचार्य
ग्वालियर। महारानी अहिल्या बाई कभी युद्ध नहीं हारी और हमेशा अजय रहीं। उन्होंने धर्मए संस्कृत तथा पुरुषार्थ के क्षेत्र में अपार योगदान दिया। 1780 में काशीनाथ विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार कराया।हर नारी को अहिल्या बाई की तरह साहस और वीरता से काम करना चाहिए। मनुष्य का मन उसके आदर्शों द्वारा काबू किया जा सकता है। व्यक्ति का चरित्र ही उसको महान बनाता है। अपने अच्छे कर्मों द्वारा ही आप समाज में परिवर्तन ला सकते हैं।यह बात शनिवार को जेयू के गालव सभागार में आयोजित देवी अहिल्याबाई होलकर जी की 300वीं जयंती के अवसर पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्रीधर पराड़कर ने बतौर मुख्य अतिथि कही।उन्होंने अहिल्या बाई के जीवन और कार्यों पर प्रकाश डाला।
मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ आचार्य प्रोण् राजरानी उपस्थित रहीं वहीं अध्यक्षता जेयू के कुलगुरू डॉण् राजकुमार आचार्य ने की।प्रोण्जे एन गौतम के स्वागत भाषण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम के दौरान सभी अतिथियों को शाल श्रीफल व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जेयू के कुलगुरू डॉण् राजकुमार आचार्य ने कहा कि समाज को प्रेरणा स्रोत देने वाले सभी स्तंभों को याद करने की जरूरत है। समाज के श्रेष्ठ जन जिस समाज का स्मरण करते हैंए समाज भी उनका स्मरण करता है। राजमाता एक आदर्श व्यक्तित्व थीं। उन्होंने पर्यावरण के प्रति भी काफी कार्य किया।इस मौके पर कुलसचिव प्रोण् राकेश कुशवाहए प्रोण् विवेक बापटए डॉ हेमंत शर्माए डॉ ण् सुशील मंडेलियाए प्रोण् एसके श्रीवास्तवएप्रोण् शांतिदेव सिसौदियाए प्रोण् एमके गुप्ताए डॉण् सपन पटेलएप्रोण् आईके पात्रोएप्रोण् मनोज शर्माएप्रोण् राजेंद्र खटीकए डॉण् स्वर्णा परमारए डॉण् सतेंद्र सिकरवारए राकेश सिंह गुर्जरए जीतेन्द्र सिंह गुर्जरए सहित छात्र एवं छात्राएं उपस्थित रहे।प्रोण् जेएन गौतम के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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