एलिवेटेड रोड का निर्माण में जमीन अधिग्रहण की वजह से लटका, प्रोजेक्ट इस वर्ष पूरा होना मुश्किल
ग्वालियर. कम्पनी ने एलिवेटेड रोड का काम पूरा करने के लिये दिसम्बर 2025 का समय ले लिया है। कंस्ट्रक्शन कम्पनी व अधिकारियों की ढिलाई की वजह पहले चरण का एलिवेटेड रोड का काम पूरा होने के लक्ष्य से पिछड़ता जा रहा है। ट्रिपल आईटीएम से लक्ष्मीबाई समाधिस्थल तक निर्माणाधीन एलिवेटेड रोड का काम अनुबंध के अनुसार इस वर्ष फरवरी में पूरा हो जाना था। लेकिन अभी तक इस रूट पर महज 60प्रतिशत ही काम हो सका है। वहीं कम्पनी प्रबंधन ने इसे पूरा करने के लिये दिसम्बर 2025 तक का समय ले लिया है। लेकिन दिसम्बर तक भी यह काम पूरा नहीं हो सकेगा। कंस्ट्रक्शन कम्पनी अपने स्तर पर धीमे काम कर रही है दूसरी ओर कई प्वाइंट के लूप व पिलर के लिये जमीन नहीं मिल पाने से काम अटकता जा रहा है। हालांकि लोक निर्माण विभाग के सेतु संभाग ने हाल ही में जमीन अधिग्रहण के लिये राशि जमा करा दी है। फिर भी प्रशासनिक अधिकारी अधिग्रहण करने और अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही में आगे नहीं बढ़ पा रही है।
अतिक्रमण चिन्हित किये जायेंगे
गिरवाई पुलिस चौकी से लक्ष्मीबाई समाधिस्थल तक निर्माणाधीन एलिवेटेड रोड लश्कर क्षेत्र के कई घनी आबादी वाले इलाकों से निकलेगी। यहां स्वर्णरेखा के किनारे कई जगह सरकारी जमीन पर अतिक्रमण है। जिन्हें हटाया जायेगा। कई जगह पर निजी जमीन का भी अधिग्रहण होना है। इस रूट पर कहां कितनी जमीन जरूरत होगी। इसके लिये सर्वे का काम चल रहा है।
49 मकान व दुकान हटाने के अलावा होना है अधिग्रहण
ट्रिपल आईटीएम से लक्ष्मीबाई समाधि स्थल तक के 6.5 किलोमीटर लंबे इस रूट में हजीरा पुलिया के पास 22 दुकानें हटाई जानी हैं। छिद्दे का पुरा,रमटापुरा में रेलवे लाइन के पास 27 मकानों को हटाया जाना है। इन अतिक्रमणों के कारण एलिवेटेड के लूप और पिलर का काम नहीं हो पा रहा। पूरे रूट में 30 से अधिक पिलरों का काम अटका हुआ है।
इस रूट के एलिवेटेड रोड में बनने वाले 13 लूप में से 8 लूप के लिए जमीन अधिग्रहण का काम अब तक पूरा नहीं हो सका है। अब तक मानपुर एवं मोहम्मदपुर और महलगांव में ही अधिग्रहण के लिए अवार्ड हो पाया है। रानीपुरा, रमटापुरा और गोसपुरा में प्रक्रिया चल रही है। जिस वजह से लूप का काम रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा।
एलिवेटेड रोड के पहले चरण का कंस्ट्रक्शन गुजरात की श्री मंगलम बिल्डकॉन इंडिया कंस्ट्रकशन कर रही है। कई प्वाइंट ऐसे हैं जहां अधिग्रहण या अतिक्रमण की समस्या न होने के बाद भी कंपनी काम में देरी कर रही है। स्वर्ण रेखा में पानी के बहाव को कंपनी सबसे बड़े बहाने के तौर पर उपयोग कर रही है। जबकि, कंपनी को स्वर्ण रेखा में पानी बहाव की स्थिति कंपनी को स्पष्ट है, लेकिन अब हो रही देरी में इसे ढाल बनाया जा रहा है।

