संविधान उल्लंघन का ठोस सबूत लाये तभी होगा हस्तक्षेप, सीजेआई ने खींच दी लक्ष्मण रेखा

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई की अध्यक्षता वाली 2 सदस्यीय पीठ ने पक्ष और विपक्ष की दलीलें सुनी। बेंच में दूसरे जज जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह थे। सुनवाई के बीच सीजेआई ने संसद से पारित कानूनों की संवैधानिकता को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने वक्फ संशोधन अधिनियम को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं से कहा है। संसद द्वारा पारित कानूनों में संवैधानिकता की धारणा होती है। कोई कानून संवैधानिक नहीं है। इसका जब तक कोई ठोस मामला सामने नहीं आता। अदालतें इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती है।

वक्फ (संशोधन) एक्ट 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को पूरे दिन सुनवाई करेगा। उम्मीद है कि सर्वोच्च न्यायालय इस मामले में अंतरिम आदेश पारित कर सकता है। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने 15 मई को सुनवाई 20 मई तक स्थगित कर दी थी। वह 3 मुद्दों पर अंतरिम निर्देश पारित करने के लिये दलीलें सुनेगी। इन मुद्दों में पहला है वक्फ संपत्तियों को डिनोटिफाई करने की शक्ति, जो कि अदालतों, वक्फ-बाय-यूजर या वक्फ डीड द्वारा वक्फ घोषित की गयी है।
याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाया गया दूसरा मुद्दा राज्य वक्फ बोर्डो और केन्द्रीय वक्फ परिषद की संरचना से संबधित है। जहां उनका तर्क है कि पदेन सदस्यों को छोड़कर केवल मुसलमानों को ही काम करना चाहिये। तीसरा मुद्दा एक प्रावधान से संबंधित है। जिसमें कहा गया है कि यदि कलेक्टर यह जांच करता है कि कोई संपत्ति सरकारी जमीन पर है तो उसके वक्फ संपत्ति नहीं माना जायेगा।
5 अप्रैल को राष्ट्रपति ने दी मंजूरी
बता दें कि केंद्र ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को अधिसूचित किया था, जब इसे 5 अप्रैल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिली थी। लोकसभा में इस विधेयक को 288 सांसदों के समर्थन से पारित किया गया, जबकि 232 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया। राज्यसभा में 128 सदस्यों ने इसके पक्ष में और 95 ने इसके खिलाफ वोट दिया।

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